केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की वीआईपी सिक्योरिटी विंग में तैनात जवानों के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग का एक आदेश, परेशानी का सबब बन गया है। अभी तक वीआईपी सुरक्षा में तैनात जवानों और अफसरों को वेतन के अलावा अन्य कोई भी स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस 'एसएसए' नहीं मिलता। दो दिन पहले व्यय विभाग से एक आदेश जारी होता है। इसमें सीएपीएफ की वीआईपी सुरक्षा में तैनात जवानों को उनके मूल वेतन पर 20 प्रतिशत 'विशेष सुरक्षा भत्ता' देने की बात कही गई। इसके लिए जो शर्त रखी गई, उसके तहत यह भत्ता केवल सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सुरक्षा करने वाले सीआरपीएफ के चुनींदा जवानों को ही मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जिनके पास जेड प्लस (एएसएल) सुरक्षा है, इनके जवानों को भी भत्ते से वंचित कर दिया गया। दूसरी तरफ जो 20 प्रतिशत सिक्योरिटी अलाउंस देने की बात कही गई है, वह देश में सबसे कम सुरक्षा भत्ता है। विभिन्न राज्यों और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों में 55 प्रतिशत तक ‘स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस’ मिल रहा है।
बता दें कि दो दिन पहले व्यय विभाग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस प्रपोजल को मंजूरी दी है, जिसमें सीएपीएफ की वीआईपी सिक्योरिटी विंग के जवानों को 20 प्रतिशत विशेष सुरक्षा भत्ता देने की बात कही गई है। इसमें जो शर्त रखी गई है, उसने सभी को हैरान कर दिया है। स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस 'एसएसए' तो मिलेगा, मगर जेड प्लस और जेड प्लस विद् (एएसएल)
सुरक्षा प्राप्त अति विशिष्ट लोगों के सिक्योरिटी कवर में शामिल जवानों को ही मिलेगा। यहां पर एक अन्य शर्त भी रख दी गई। उसमें कहा गया कि ऐसे अति विशिष्ट व्यक्ति, जिनके पास अब जेड प्लस या जेड प्लस (एएसएल) सुरक्षा है, मगर इससे पहले उनके पास एसपीजी या एनएसजी सुरक्षा रही है। यानी एसपीजी या एनएसजी के बाद उनकी सुरक्षा सीएपीएफ की वीआईपी सुरक्षा विंग को मिली है। ऐसे जवानों को ही बीस प्रतिशत विशेष सुरक्षा भत्ता मिलेगा। यहां पर तीसरी शर्त यह रहेगी कि ये भत्ता केवल उन्हीं जवानों को मिलेगा, जो ड्यूटी पर होंगे। वैसे नहीं मिलेगा, जैसे विशेष जोखिम वाले क्षेत्रों में तैनात बटालियन के सभी जवानों को मिलता है।
सूत्रों के मुताबिक, देश में जेड प्लस (एडवांस सिक्योरिटी लाइजन) 'एएसएल' सुरक्षा केवल पांच लोगों को ही मिली हुई थी। इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर शामिल हैं। हालांकि तकनीकी रूप से गुरशरण कौर के पास पहले से ही एडवांस सिक्योरिटी लाइजन नहीं है। वजह, उनका कहीं बाहर आना जाना नहीं रहता था। ऐसे में अब चार अति विशिष्ट व्यक्ति बचे हैं, जिनके पास जेड प्लस 'एएसएल' सुरक्षा है। कुछ समय पहले ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भी जेड प्लस 'एएसएल' सुरक्षा मिली है। हालांकि उनके पास सीआईएसएफ का सुरक्षा कवर है। उनकी सुरक्षा में तैनात जवानों को भी सुरक्षा भत्ता नहीं मिलेगा। वजह, उनके पास पहले एसपीजी/एनएसजी सुरक्षा नहीं थी।
व्यय विभाग के आदेश के अनुसार, जिन व्यक्तियों के पास पहले एसपीजी या एनएसजी सुरक्षा रही हो और बाद में वह सुरक्षा कवर सीएपीएफ की वीआईपी विंग ने टेक ओवर कर लिया हो, केवल उसी स्थिति में सीएपीएफ जवानों को बीस प्रतिशत विशेष सुरक्षा भत्ता मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्री के पास तो शुरु से ही सीआरपीएफ का जेड प्लस 'एएसएल' सुरक्षा कवर रहा है। ऐसे में अब उनके पास जो सुरक्षा दस्ता है, वह भी बीस प्रतिशत सुरक्षा भत्ते के दायरे में नहीं आता। मतलब, अब केवल तीन लोगों की सुरक्षा में तैनात जवानों को ही ड्यूटी के दौरान विशेष सुरक्षा भत्ता मिलेगा। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सुरक्षा में सीआरपीएफ का वीआईपी सुरक्षा दस्ता जेड प्लस 'एएसएल' तैनात है।
यहां पर भी कई तरह की तकनीकी उलझनें सामने आएंगी। जैसे ये तीनों विशिष्ट व्यक्ति अगर दिल्ली से बाहर कहीं जाते हैं तो दूसरी जगह से सीआरपीएफ का सुरक्षा दस्ता उनके साथ जाएगा। यानी, जिस स्थान पर इन्हें जाना है, उस जगह के करीब सीआरपीएफ की वीआईपी विंग है तो वहां से जवान, उनके साथ जाएंगे। अब उनका अलग से बिल बनेगा। चूंकि सभी को ये भत्ता नहीं मिलेगा, ऐसे में ड्यूटी वालों का अलग से रिकॉर्ड रहेगा। दिल्ली में तैनात जवानों का अलग से खाता तैयार होगा।
सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर, नक्सल या उत्तर पूर्व में केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात हैं तो वहां पर बटालियन के सभी लोगों को समान भत्ता मिलता है। इसी के चलते जवान और अफसरों को जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से कोई दिक्कत नहीं होती। वे रिस्क लेने के लिए आगे आते हैं। मौजूदा समय में सीएपीएफ की वीआईपी सिक्योरिटी विंग को सुरक्षा भत्ता नहीं मिलता। नतीजा, नए लोग इस विंग में नहीं आ रहे हैं। वीआईपी सुरक्षा के लिए अफसरों और जवानों की कमी हो रही है।
सूत्रों का कहना है कि वीआईपी सिक्योरिटी में आना आसाना नहीं होता। इसके लिए कठोर प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। मनोवैज्ञानिक टेस्ट होते हैं। तकनीकी दक्षता परखी जाती है। उसके बाद शारीरिक दक्षता टेस्ट होता है। यहां पर भी टेस्ट का अंत नहीं होता। कई दूसरी परीक्षाओं से भी जवानों और अफसरों को गुजारा जाता है। अगर ये सभी पड़ाव पास हो जाते हैं तो उसके बाद ट्रेनिंग प्रारंभ होती है। ये ट्रेनिंग भी बहुत मुश्किल होती है। पिछले कुछ समय से देखने को मिल रहा है कि बहुत से जवान और अफसर, इस प्रक्रिया में जानबूझकर फेल हो जाते हैं। वजह, उन्हें इस ड्यूटी में अलग से कुछ नहीं मिलता। टूर के दौरान उन्हें खर्च का कुछ हिस्सा तो अपनी जेब ही खर्च करना पड़ता है। बाद में जो बिल जमा होते हैं, वे सभी पास हो जाएं, ऐसी गारंटी नहीं होती। दूसरी तरफ कश्मीर, उत्तर पूर्व या नक्सल में सभी लोगों को अपने रैंक के हिसाब से जोखिम भत्ता मिल जाता है। ऐसे में वे वहीं पर पोस्टिंग लेने का प्रयास करते हैं।
किस राज्य में कितना 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' ...
आंध्रप्रदेश: राज्यपाल और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात जवानों को 50 प्रतिशत विशेष सुरक्षा भत्ता मिलता है।
छत्तीसगढ़: नक्सल प्रभावित राज्य में भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री की सुरक्षा करने वाले जवानों को 50 प्रतिशत भत्ता मिलता है।
पंजाब: यहां पर भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात कर्मियों को 50 फीसदी विशेष सिक्योरिटी भत्ता मिलता है।
उत्तर प्रदेश: इस राज्य में भी बेसिक वेतन पर विशेष सिक्योरिटी भत्ता 50 प्रतिशत किया गया है।
बिहार: यहां पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री की सुरक्षा करने वाले जवानों को 40 प्रतिशत विशेष सुरक्षा भत्ता मिलता है।
मध्यप्रदेश: राज्यपाल और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगे जवानों को 30 प्रतिशत विशेष सुरक्षा भत्ता मिलता है।
केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों को मिल रहा ये भत्ता ...
एसपीजी: प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात जवानों को बेसिक पे पर 50 प्रतिशत (ऑपरेशनल ड्यूटी) स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस मिलता है।
एनएसजी: राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवानों को मोबाइल सिक्योरिटी के लिए बेसिक पे पर 40 प्रतिशत स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस मिलता है।
एसडीजी: स्टेटिक ड्यूटी के लिए 20 प्रतिशत भत्ता मिलता है।
पीडीजी: स्टेटिक ड्यूटी पर बेसिक पे का 20 प्रतिशत भत्ता मिलता था।
सीएपीएफ: ताजा आदेश में ड्यूटी वाले चुनींदा जवानों को मूल वेतन पर 20 प्रतिशत भत्ता देने की बात
बल के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि सिक्योरिटी विंग में कार्यरत सभी जवानों व अधिकारियों का भत्ता बढ़ाया जाना चाहिए। अगर यहां उन्हें कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा, तो नए कमांडो का वीआईपी ड्यूटी में आने के लिए उत्साह खत्म हो जाएगा। केंद्र सरकार को 'वीआईपी' ड्यूटी में तैनात जवानों और अफसरों को उनके मूल वेतन का 40 फीसदी 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' मिलना चाहिए। सीआरपीएफ व दूसरे बलों के कमांडो को कोई खास टीए/डीए भी नहीं मिलता। यह भत्ता मुश्किल से तीन चार हजार रुपये तक सिमट जाता है। जोखिम वाले इलाकों में तैनात बल के जवानों को रिस्क अलाउंस भी मिलता है। अगर सीआरपीएफ व दूसरे बलों की वीआईपी सुरक्षा विंग को 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' दिया जाता है, तो बल के अन्य कमांडो भी वीआईपी सुरक्षा विंग में आने के लिए प्रेरित होंगे।