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विपक्षी एकता को फिर लगा झटका, ममता की रैली में शामिल नहीं होंगे सोनिया और राहुल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 16 Jan 2019 01:25 PM IST
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सोनिया गांधी और राहुल गांधी - फोटो : PTI

आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए विपक्ष अपने गठबंधन को मजबूत करने की हर संभव कोशिश कर रहा है। इसी बीच कोलकाता में 19 जनवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विपक्षी दलों की रैली होने वाली है। लेकिन इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल नहीं होगे। वह अपनी जगह पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजेंगे। 

बनर्जी ने इस रैली में आने के लिए यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी आमंत्रण भेजा था। जिससे विपक्षी एकता की ताकत और भी मजबूती के साथ दिखाई दे। लेकिन एक महीने तक बनर्जी को इंतजार करवाने के बाद उन्होंने भी आमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है।



सूत्रों के मुताबिक सोनिया और राहुल गांधी ने रैली में शामिल न होने का फैसला इसलिए लिया है क्योंकि पश्चिम बंगाल कांग्रेस यूनिट बनर्जी के साथ वरिष्ठ नेताओं के मंच साझा करने के पक्ष में नहीं है। बताया जा रहा है कि राज्य की कांग्रेस यूनिट का कहना है कि वह आने वाले लोकसभा चुनावों को अकेला लड़ने के लिए तैयार हैं और उन्होंने ही राहुल गांधी को रैली में शामिल न होने का सुझाव दिया है। राहुल गांधी के रैली में शामिल न होने से फिर ये सवाल गहराएगा कि महागठबंधन का प्रधानमंत्री कौन बनेगा?

इससे पहले ममता बनर्जी कह चुकी हैं कि महागठबंधन के प्रधानमंत्री पर चर्चा 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के बाद ही हो सकती है। राज्य सचिवालय में बातचीत के दौरान ममता ने कहा था, "लोकसभा चुनाव 2019 के बाद ही इसपर चर्चा हो सकती है। एक बार जब विपक्षी गठबंधन जीत जाएगा तो सभी पार्टियां इस मामले पर फैसला लेंगी।"

ममता का ये बयान डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के बयान के बाद आया था। एमके स्टालिन ने राहुल गांधी का नाम 2019 के चुनावों में पीएम पद के लिए प्रस्तावित किया था। चेन्नई में विपक्ष के कार्यक्रम में स्टालिन ने कहा था, "राहुल गांधी के अंदर फासीवादी मोदी सरकार को हराने की क्षमता है। हम सभी को उनका साथ देना चाहिए और देश को बचाने में उनकी मदद करनी चाहिए।" 

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सोनिया गांधी और राहुल गांधी - फोटो : PTI
आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए विपक्ष अपने गठबंधन को मजबूत करने की हर संभव कोशिश कर रहा है। इसी बीच कोलकाता में 19 जनवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विपक्षी दलों की रैली होने वाली है। लेकिन इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल नहीं होगे। वह अपनी जगह पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजेंगे। 

बनर्जी ने इस रैली में आने के लिए यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी आमंत्रण भेजा था। जिससे विपक्षी एकता की ताकत और भी मजबूती के साथ दिखाई दे। लेकिन एक महीने तक बनर्जी को इंतजार करवाने के बाद उन्होंने भी आमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक सोनिया और राहुल गांधी ने रैली में शामिल न होने का फैसला इसलिए लिया है क्योंकि पश्चिम बंगाल कांग्रेस यूनिट बनर्जी के साथ वरिष्ठ नेताओं के मंच साझा करने के पक्ष में नहीं है। बताया जा रहा है कि राज्य की कांग्रेस यूनिट का कहना है कि वह आने वाले लोकसभा चुनावों को अकेला लड़ने के लिए तैयार हैं और उन्होंने ही राहुल गांधी को रैली में शामिल न होने का सुझाव दिया है। राहुल गांधी के रैली में शामिल न होने से फिर ये सवाल गहराएगा कि महागठबंधन का प्रधानमंत्री कौन बनेगा?

इससे पहले ममता बनर्जी कह चुकी हैं कि महागठबंधन के प्रधानमंत्री पर चर्चा 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के बाद ही हो सकती है। राज्य सचिवालय में बातचीत के दौरान ममता ने कहा था, "लोकसभा चुनाव 2019 के बाद ही इसपर चर्चा हो सकती है। एक बार जब विपक्षी गठबंधन जीत जाएगा तो सभी पार्टियां इस मामले पर फैसला लेंगी।"

ममता का ये बयान डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के बयान के बाद आया था। एमके स्टालिन ने राहुल गांधी का नाम 2019 के चुनावों में पीएम पद के लिए प्रस्तावित किया था। चेन्नई में विपक्ष के कार्यक्रम में स्टालिन ने कहा था, "राहुल गांधी के अंदर फासीवादी मोदी सरकार को हराने की क्षमता है। हम सभी को उनका साथ देना चाहिए और देश को बचाने में उनकी मदद करनी चाहिए।" 

मायावती की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं

मायावती
बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस आमंत्रण के बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के रैली में शामिल होने को लेकर भी सवाल उत्पन्न हो गया है। सूत्रों का कहना है कि राव ने फैसला लिया है कि वह रैली में शामिल नहीं होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि वह राहुल गांधी के साथ मंच साझा नहीं करना चाहते। वहीं वामपंथी दल ने भी टीएमसी की विपक्षी दलों की रैली में शामिल न होने का फैसला लिया है।

बनर्जी दावा कर चुकी हैं कि उनकी इस रैली में गैर भाजपा दलों की भागीदारी कश्मीर से कन्याकुमारी तक दिखाई देगी। बनर्जी का ये भी कहना है कि पूर्वी क्षेत्र में बीते चार दशकों में यह सबसे बड़ी पब्लिक मीटिंग होगी।

टीएमसी ने रैली में शामिल होने के लिए कई विपक्षी दलों को निमंत्रण भेजा था। जिसमें तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी), जनता दल (सेक्युलर), आम आदमी पार्टी (आप), नेशनल कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) शामिल हैं।
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