बता दें कि दुबई के राजकुमारी को भेजे जाने के आठ महीने मिशेल को लाया गया। राजकुमारी शेख लतीफा दुबई के शासक और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की बेटी हैं। लतीफा की नाव को भारतीय कोस्ट गार्ड ने गोवा के तट पर उस वक्त पकड़ लिया था जब वह यूएई से भागकर भारत आ रही थीं। मार्च 2018 की घटना के समय राजकुमारी लतीफा की योजना फ्लोरिडा की फ्लाइट पकड़ने की थी। उन्हें भारत-अमीरात के संयुक्त ऑपरेशन के तहत दुबई वापस भेज दिया गया था।
दुबई में डीटेन्ड की सीईओ राधा स्टर्लिंग का कहना है कि इस संयुक्त ऑपरेशन की स्वीकृति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शेख मोहम्मद के साथ एक निजी फोन कॉल के बाद दी थी। इस गैरकानूनी कार्रवाई में भारत की हिस्सेदारी के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर आलोचना भी झेलनी पड़ी थी, जिसमें संयुक्त राष्ट्र की बिठाई गई एक आधिकारिक जांच भी शामिल है।
संक्षेप में कहें तो यूएई ने भारत की मदद की। ऐसा लगता है कि भारत द्वारा राजकुमारी लतीफा को वापस दुबई भेजे जाने में भारत की भूमिका के बाद यूएई ने आपसी व्यवहार के चलते मिशेल का प्रत्यपर्ण किया है। आपराधिक जांच और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का कभी राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। संयुक्त अरब अमीरात में भारत के नागरिकों के साथ मानवाधिकार उल्लघन के कई मामलें सामने आते हैं, ऐसे प्रत्यर्पण के बजाए भारत को अपने नागरिकों के मामलों में हस्तक्षेप कर उनकी मदद करनी चाहिए।
मिशेल की कानूनी टीम के एक सदस्य ने कहा कि मेरी समझ में भी यह मामला एक अदला-बदली की डील का है।
बता दें कि अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे से जुड़े सीबीआई के मामले में मिशेल 27 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में है। मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था। उसे 22 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और तब से अदालती आदेश पर एजेंसी की हिरासत में है।