माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने एक ट्वीट में कहा, मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक के जीवन ने थ्री इडियट्स को प्रेरित किया है। उन्होंने लद्दाख की अनूठी विशेषताओं की रक्षा करने के लिए एक अभियान शुरू किया और इसके लिए वह नजरबंद हैं।
लद्दाख के शिक्षा सुधारवादी सोनम वांगचुक ने दावा किया कि उन्हें उनके लेह स्थित संस्थान में नजरबंद किया गया है। इसके एक दिन बाद रविवार को माकपा ने सरकार पर निशाना साधा है। माकपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें केंद्र शासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची के तहत लाने पर बोलने से रोका है। हालांकि पुलिस ने वांगचुक के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें खारदुंग ला टॉप पर केवल पांच दिन का उपवास रखने से रोका गया है।
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माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने एक ट्वीट में कहा, 'मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक के जीवन ने थ्री इडियट्स को प्रेरित किया है। उन्होंने लद्दाख की अनूठी विशेषताओं की रक्षा करने के लिए एक अभियान शुरू किया और इसके लिए वह नजरबंद हैं। उन्हें छठी अनुसूची और जलवायु परिवर्तन के खतरों और गणतंत्र दिवस पर बोलने से रोका गया। निंदनीय है।'
वांगचुक ने लद्दाख के लोगों की मांगों पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए 26 जनवरी से 18,380 फीट ऊंचे खारदुंग ला पर भूख हड़ताल की घोषणा की थी। इनमें संविधान की छठी अनुसूची का विस्तार और अनियंत्रित औद्योगिक और वाणिज्यिक विस्तार से पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं।