आज कोरोना के प्रकोप के बाद चीन में फैक्ट्रियां बंद हैं, एक्सपोर्ट्स बंद हैं और बेरोजगारी 20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है, लोग बहुत नाराज हैं, क्रांति हो सकती है, तख्तापलट हो सकता है। इसीलिए चीन अपने पड़ोसियों से दुश्मनी करके अपनी जनता को अपने साथ जोड़ने में लगा हुआ है और यह पहली बार नहीं कर रहा है। 1962 में जब भारत के साथ जंग की तो वो जंग भी उसने अपनी जनता को संभालने के लिए की थी, तब चार साल का आकाल और भुखमरी हुई थी और इससे ध्यान हटाने के लिए यह जंग की थी।
चीन के लिए अपनी जीडीपी और जो खुशहाली है, उसे बढ़ाते रहना बहुत ही जरूरी है, और जिस दिन जीडीपी घट जाये वहां की जनता क्रांति के लिए तैयार है, मैं तो कहता हूँ कि इस बार भारत की बुलेट पॉवर से भी वॉलेट पॉवर काम आएगी, जो नागरिक पैसा खर्च करते हैं चीन के सामान को खरीदने में।
जरा सोचिए हम आप भारतीय उद्योग को मार कर चीन से मूर्तियों से कपड़ों तक हर साल पांच लाख करोड़ के सामान खरीदते हैं और फिर ये पैसा आगे जाकर हमारे सीमा पर हथियार और बन्दूक बनकर हमारे सैनिकों के मौत का कारण बन सकते हैं, तो इसलिए अगर हमारे देश के 130 करोड़ लोग और तीन करोड़ भारतीय जो बाहर के देशों में हैं, सब मिलकर भारत में और बल्कि दुनिया भर में एक बायकाट मेड इन चाइना मूवमेंट या अभियान शुरू करते हैं तो आज दुनिया भर में चीन के प्रति रोष है।
हो सकता है कि सारी दुनिया साथ आए और इतने बड़े स्तर पर चीनी व्यापार का बायकॉट हो, कि चीन को जिसका सबसे बड़ा डर था वही हो, यानी कि उसकी अर्थव्यवस्था डगमगाए और उसकी जनता रोष में आये, विरोध और तख्तापलट और अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो कितनी बदनसीबी की बात होगी भारत के लिए, जरा सोचिए, एक तरफ हमारी सेना सीमा पर जंग लड़ रही होगी, और दूसरी तरफ हम आप चीनी सामान मोबाइल से लेकर कंप्यूटर, कपड़ों से लेकर खिलौनों तक, को खरीद कर उनकी सेना को पैसा भेज रहे होंगे, चीन की सेना को। इसके अलावा उन्होंने और कई सारी बातें कहीं।