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Supreme Court : लिवर दान के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था बेटा, आदेश से पहले पिता का निधन

Thu, 15 Sep 2022 05:08 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

किशोर के पिता को लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत थी। इससे पहले डॉक्टरों ने किशोर की मां द्वारा लिवर दान करने की संभावना को लेकर परीक्षण किया था लेकिन उनको फिट नहीं पाया।
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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के एक 17 वर्षीय किशोर ने नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती अपने पिता की जान बचाने के लिए जो भी संभव हो सका किया। यहां तक कि वह उनके लिए लिवर भी देने को तैयार हो गया था और इसकी अनुमति लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, वह अपने पिता की जान नहीं बचा सका। सुप्रीम कोर्ट ने किशोर के लिवर देने की इजाजत मांगने की याचिका पर दखल भी दिया लेकिन इससे पहले कि अदालत कोई प्रभावी आदेश पारित करती, उसके पिता दुनिया से चल बसे।

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जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने किशोर की याचिका पर पिछले शुक्रवार (9 सितंबर) को नोटिस जारी किया था। बुधवार को पीठ को जानकारी दी गई कि नोटिस जारी करने के अगले ही दिन किशोर के पिता की मौत हो गई। यह सुनते ही कोर्ट रूम में माहौल गमगीन हो गया। 

मां लिवर दान के लिए फिट नहीं थीं
किशोर के पिता को लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत थी। इससे पहले डॉक्टरों ने किशोर की मां द्वारा लिवर दान करने की संभावना को लेकर परीक्षण किया था लेकिन उनको फिट नहीं पाया। पिता की बहन भी मेडिकल कारणों से लिवर दान नहीं कर पाई, लिहाजा नाबालिग बेटे ने सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मांगी थी।

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