सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि यह कहना या समझना गलत है कि पुरुष अधिकारी, महिला अधिकारियों के आदेश या निर्देश नहीं मानते। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल मेहता ने मीडिया में छपी रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि उनके कहने का यह मतलब कतई यह नहीं था कि पुरुष अधिकारी, महिला अधिकारी से निर्देश नहीं ले सकते।
उन्होंने मीडिया रिपोर्ट को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मेहता के इस पक्ष पर पीठ ने भी सहमति जताई। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वह मीडिया रिपोर्ट को देखकर हैरान हो गए। रक्षा मंत्रालय की ओर से पक्ष रख रहे मेहता ने यह भी कहा, ‘मेरा मानना है कि महिलाओं को पुरुष के समक्ष समानता के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए।
वास्तव में महिलाएं सभी मामलों में पुरुषों से ऊपर और बेहतर हैं। स्थायी कमीशन और नियुक्तियों में किसी तरह का लैंगिक भेदभाव नहीं है। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिनमें भेदभाव हो।’ याचिकाकर्ता महिला अधिकारी की ओर से कहा गया कि उपलब्ध आंकड़ों के तहत महिला अधिकारियों को पुरुष अधिकारियों के समान नहीं माना जाता। इसके साथ ही पीठ ने महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन के मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।