युद्ध क्षेत्र की नई चुनौतियों से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जवानों को कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस बीच बीएसएफ ने अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम में ड्रोन युद्ध को अनिवार्य विषय के रूप में जोड़ा है। इसके तहत जवानों और सैन्य अधिकारियों को ड्रोन युद्ध से निपटने के तरीके सिखाए जाएंगे। साथ ही स्वदेशी उपकरण विकसित करने के लिए बीएसएफ ने नवाचार केंद्र की भी स्थापना की है।
ग्वालियर के निकट टेकनपुर में 2.70 लाख कर्मियों वाले बीएसएफ अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी ने रुस्तमजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आरजेआईटी) के साथ मिलकर ड्रोन प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला भी बनाई है। रुस्तमजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत अर्धसैनिक बल द्वारा संचालित एकमात्र उच्च शिक्षा संस्थान है।
बीएसएफ अकादमी के निदेशक शमशेर सिंह ने कहा कि हमने जवानों और अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में संशोधन किया है और ड्रोन प्रौद्योगिकी को अब अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया गया है। एसओपी को औपचारिक रूप दिया जा रहा है। इस पहल के तहत ड्रोन स्कूल का उद्घाटन किया गया है। ताकि बल को दुनिया भर में युद्ध के बदलते तरीकों से निपटने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित प्रौद्योगिकी के साथ आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
निदेशक शमशेर अधिकारी सिंह ने कहा कि बीएसएफ अपने विभिन्न शस्त्र एवं इंजीनियरिंग कार्यशालाओं, केंद्रों, आरजेआईटी और संबद्ध संस्थानों को एक मंच पर लाया है। सीमा बल में ड्रोन तकनीक के सामरिक उपयोग का रोडमैप तैयार करने के लिए विभिन्न आईआईटी और सरकारी अनुसंधान संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
इसके अलावा बीएसएफ अकादमी ने आंतरिक सुरक्षा क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए अपने विशेषज्ञ अधिकारियों, उद्योगों, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और नवप्रवर्तकों की भागीदारी से एक पुलिस प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र भी बनाया है। यह केंद्र 48 चिन्हित समस्याओं पर काम करेगा। इसमें ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, निगरानी और स्मार्ट मोबिलिटी पर काम होगा। एक अधिकारी ने बताया कि आरजेआईटी के बीटेक छात्र अपनी प्रयोगशाला में एक विशेष क्षेत्र में सुधार कर रहे हैं। ताकि निगरानी, रक्षा और सामरिक युद्ध के लिए बीएसएफ द्वारा ड्रोन का बेहतर उपयोग किया जा सके।
ड्रोन स्कूल में दिया गया बीएसएफ कर्मियों को प्रशिक्षण
बीएसएफ के ड्रोन स्कूल ने अभी-अभी ड्रोन कमांडो और ड्रोन योद्धा पाठ्यक्रमों में लगभग 45 कर्मियों के पहले बैच को प्रशिक्षित किया है और वे सीमा पर वापस आ गए हैं। दूसरा बैच प्रशिक्षण ले रहा है। केंद्र के एक प्रशिक्षक ने बताया कि इसका उद्देश्य सालाना लगभग 500 कर्मियों को प्रशिक्षित करना है। धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि ड्रोन कमांडो पाठ्यक्रम जवानों और कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों के लिए है। जबकि ड्रोन योद्धा कैप्सूल अधिकारियों के लिए है, जो शांति और युद्ध के दौरान ऐसे अभियानों की योजना बनाएंगे और उनकी निगरानी करेंगे। बीएसएफ जवानों को ड्रोन उड़ाने, ड्रोन रोधी अभियानों और प्रौद्योगिकी की सामरिक तैनाती के सिद्धांत और व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि नए स्कूल के लिए गैजेट, उपकरण और सिमुलेटर खरीदने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। बीएसएफ ने दुनिया भर में युद्ध में मानवरहित हवाई प्लेटफार्मों के उपयोग का अध्ययन करने के बाद ट्यूटोरियल तैयार किया है।