सस्ते सामान के दम पर धीरे-धीरे देश के बाजारों पर कब्जा कर रहे ड्रैगन को यूपी के अमरोहा के सोलर डीसी पंखा कारोबार ने करारा झटका दिया है। चीन के पंखों से भी सस्ता होने से इस बाजार में वह पकड़ मजबूत नहीं कर पा रहा है। पिछले दस वर्षों में अमरोहा के डीसी सोलर पंखा कारोबार ने बुलंदियों को छुआ है। नतीजतन देशभर में इसकी मांग है और ड्रैगन पस्त हो गया है। यही वजह है देशभर के मार्केट में चाइना के सोलर पंखों की खपत दस फीसदी तक ही रह गई है।
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देश के बाजारों में ‘ड्रैगन’ मतलब चीन के ही बने सामान दिखाई देते हैं। इससे देश के कुटीर उद्योग से लेकर बड़े उद्योग तक प्रभावित हुए हैं, मगर गुणवत्ता और कीमत कम होने से डीसी सोलर पंखा कारोबार में अमरोहा ने उसका रास्ता रोक दिया है। रेट काफी सस्ता होने पर दिल्ली का बाजार मिला, तो उत्पाद में खूबसूरती भी आ गई। मौजूदा समय में डीसी पंखे नए-नए अवतार में सोलर पैनल के साथ देशभर में उपलब्ध है। ढाई सौ रुपये से लेकर चार सौ रुपये तक की कीमत से यह जरूरतमंदों को सुकून दे रहा है।
15 साल पहले हुई थी शुरुआत
कारोबारी चौधरी सुखराज सिंह कहते हैं, डीसी और सोलर पैनल पंखों के कारोबार को इस मुकाम तक लाने में काफी मेहनत करनी पड़ी है। हजारों परिवार को रोजगार मिला हुआ है। करीब पंद्रह वर्ष पहले डीसी पंखे बनाने की शुरुआत हुई थी। उस वक्त देखने में पंखे काफी साधारण थे। फिलहाल सोलर पैनल पंखों के कारोबार के मामले में चीन की मौजूदगी सिमट रही है।
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हजारों घरों में तैयार किए जाते हैं पार्ट्स
एक पंखा कई तरह के पार्ट्स से मिलकर बनता है। मौजूदा वक्त में शहर के करीब ढाई हजार से अधिक घरों में पंखों के अलग-अलग पार्ट्स तैयार किए जाते हैं। पार्ट्स तैयार करने से लेकर पंखा बांधने तक का सारा काम यहीं होता है। पंखे को अंतिम रूप देने वाले कारोबारी अलग-अलग लोगों से पार्ट्स खरीदते हैं। वहीं सोलर पैनल दिल्ली से मंगाए जाते हैं।
कुटीर उद्योग होने के कारण छोटे-छोटे कारोबारी टैक्स देने से भी बच जाते हैं। मिलजुलकर काम करने की वजह से पंखा काफी सस्ता पड़ता है और इसी वजह से ड्रैगन अपनी जगह नहीं बना पा रहा है। टीपीनगर चौराहा पर रहने वाले शाहिद सैफी कहते हैं, अमरोहा में जब इस काम की शुरुआत हुई, तो पार्ट्स दिल्ली से मंगाए जाते थे, जो काफी महंगे होते थे। पंद्रह साल पहले एक डीसी पंखे की कीमत ढाई सौ रुपये थी। अमरोहा में पार्ट्स बनाने का काम शुरू हुआ, तो पंखे की कीमत काफी सस्ती हो गई।
उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, मध्यप्रदेश में हो रही डीसी पंखों की सप्लाई
छोटी सी बैटरी से चलने वाले अमरोहा के डीसी पंखे ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और मध्य प्रदेश के बाजार पर छाप छोड़ी है। अमरोहा के अलावा भी तमाम शहरों में डीसी पंखों का काम हो रहा है, लेकिन बेहतर क्वालिटी और सस्ता होने से अमरोहा के पंखे की मांग बढ़ी है। यही कारण है कि कई राज्यों में डीसी पंखों की सप्लाई सीधे अमरोहा से होती है।
डीसी और सोलर पैनल के पंखों के कारोबार में अमरोहा ने अलग मुकाम हासिल किया है। ढाई हजार से अधिक घरों में यह काम चल रहा है। सालाना टर्न ओवर भी करोड़ों में पहुंच चुका है। वाणिज्यकर विभाग को भी लाखों में टैक्स की अदायगी की जाती है।
14.5 फीसदी वाणिज्यकर लगने से आहत हैं कारोबारी
चौधरी सुखराज सिंह कहते हैं, डीसी पंखा बनाने का कार्य हथकरघा उद्योग में शुमार है। सोलर पैनल टैक्स फ्री है, लेकिन सोलर पैनल पंखा पर 14.5 फीसदी टैक्स अदा करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश सरकार की इस दोहरी नीति ने कारोबारियों को परेशान कर रखा है। जबकि डीसी और सोलर पंखा बनाने की कोई फैक्ट्री नहीं है। इस काम के लिए छोटा सा स्थान ही काफी है। यदि कारोबार को टैक्स फ्री कर दिया जाए, तो कारोबारियों की माली हालत में भी सुधार आ सकता है।