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मिट्टी की नमी मापने की तकनीक: इसरो ने कहा- हर 12 दिन में 100 मीटर रिजॉल्यूशन का डाटा देगा निसार; जानिए सबकुछ

Sat, 14 Feb 2026 11:57 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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निसार मिशन (फाइल) - फोटो : एक्स/इसरो/वीडियो ग्रैब
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया है कि नासा-इसरो के संयुक्त मिशन निसार के जरिये देशभर की जमीन की नियमित निगरानी की जा रही है। यह उपग्रह एस और एल बैंड तकनीक से भारत की संपूर्ण धरती की तस्वीरें ले रहा है और हर 12 दिन में नया डाटा उपलब्ध करा रहा है।

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इस डाटा की मदद से 100 मीटर के उच्च रिजॉल्यूशन पर मिट्टी की नमी का आकलन किया जा रहा है। मिट्टी में नमी की मात्रा फसल की सेहत, सिंचाई की जरूरत और सूखे के खतरे को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए यह जानकारी किसानों और जल प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों के लिए उपयोगी होगी।

इसरो के अनुसार, यह प्रणाली देश के अलग-अलग कृषि क्षेत्रों सिंचित इलाकों, वर्षा पर निर्भर खेती वाले क्षेत्रों, कम बारिश वाले और अधिक वर्षा वाले इलाकों में एक समान और भरोसेमंद आंकड़े देती है। मिट्टी की नमी मापने की तकनीक का विकास इसरो के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर में किया गया है। इससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
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रियल टाइम में मिट्टी की नमी की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी
इसरो ने कहा कि निसार हर 12 दिन में दो बार जानकारी जुटाने में सक्षम है। इससे लगभग वास्तविक समय (रियल टाइम) में मिट्टी की नमी की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी। इससे सिंचाई की योजना बनाने, सूखे की तैयारी करने और कृषि संबंधी सलाह जारी करने में मदद मिलेगी। 100 मीटर स्तर-4 मिट्टी नमी डाटा का नियमित निर्माण नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर में किया जाएगा। यह जानकारी भू निधि पोर्टल के जरिए किसानों, शोधकर्ताओं, सरकारी एजेंसियों और अन्य संस्थाओं को उपलब्ध कराई जाएगी।

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