व्यावसायिक वाहनों में लगने वाले स्पीड गवर्नर के साथ छेड़छाड़ करना भारी पड़ेगा। परिवहन विभाग स्पीड गवर्नर को अपने वाहन सॉफ्टवेयर (रजिस्ट्रेशन के लिए प्रयोग होता है) से लिंक करने की तैयारी कर रहा है। नेशनल इन्फॉरमेशन सेंटर (एनआईसी) ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। इससे वाहनों में लगे स्पीड गवर्नर का रिकॉर्ड परिवहन विभाग के पास होगा। छेड़छाड़ की गई तो फिटनेस के समय इसका पता चल जाएगा।
व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस के समय पकड़ लेगा विभाग, चल रहा है काम
कमर्शियल वाहनों में गति को नियंत्रित रखने के लिए स्पीड गवर्नर लगाने का प्रावधान है। वाहन स्वामी रजिस्ट्रेशन के समय तो इसे लगवाते हैं, लेकिन थोड़े समय बाद हटा देते हैं। फिटनेस जांच के लिए दोबारा आने पर वे फिर कहीं से दूसरा स्पीड गवर्नर थोड़े समय के लिए लगवा लेते हैं। एक साल या छह महीने का फिटनेस प्रमाण पत्र मिलने के बाद उसे दोबारा हटा दिया जाता है।
परिवहन अधिकारियों के मुताबिक, वाहन सॉफ्टवेयर से स्पीड गवर्नर लिंक होने के बाद चालक ऐसा करेगा तो पकड़ा जाएगा। परिवहन विभाग के मुताबिक, हर स्पीड गवर्नर का एक सीरियल नंबर या यूनिक नंबर होता है। वह नंबर परिवहन विभाग के वाहन सॉफ्टवेयर में फीड कर दिया जाएगा। वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डालते ही अन्य सूचनाओं के साथ स्पीड गवर्नर की डिटेल भी आ जाएगी। चालक फिटनेस के दौरान बदले हुए स्पीड गवर्नर के साथ आएगा तो सॉफ्टवेयर में फीड सीरियल नंबर के साथ मैच न होने पर तुरंत पकड़ा जाएगा।
क्या है स्पीड गवर्नर
यह किसी वाहन की गति नियंत्रित करने के लिए लगाया जाता है। इसमें एक निश्चित गति से ऊपर वाहन नहीं चल पाता। स्पीड 40, 60 या 80 किलोमीटर प्रतिघंटा हो सकती है। ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट समेत सिटी टैक्सी परमिट वाले वाहनों में भी यह लगाया जाता है। यह वाहन के इंजन के साथ लगता है। चालक स्पीड अपने हिसाब से तय करने के लिए इसके साथ छेड़छाड़ करते हैं।