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RSS: जेपी नड्डा के बयान को संघ ने बताया पारिवारिक मामला; शाखाओं में लड़कियों के लिए व्यवस्था पर कही यह बात

Wed, 25 Sep 2024 06:49 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

आरएसएस ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान को पारिवारिक मामला बताया है। वहीं संघ की शाखाओं में केवल लड़कों के लिए व्यवस्था पर वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारी सुनील आंबेकर ने कहा कि समाज बदलाव नहीं चाहता है। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल जमीनी स्तर पर ऐसी कोई मांग नहीं है।
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समाज बदलाव नहीं चाहता- सुनील आंबेकर - फोटो : ANI
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी सुनील आंबेकर ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की उस टिप्पणी को पारिवारिक मामला बताया जिसमें जेपी नड्डा ने कहा था कि भगवा पार्टी आरएसएस पर निर्भर रहने से आत्मनिर्भर बन गई है। वहीं ये पूछे जाने पर कि क्या जेपी नड्डा की टिप्पणियों ने भाजपा और संघ के बीच दरार पैदा की है। इस पर उन्होंने कहा, हम पारिवारिक मामलों को पारिवारिक मामलों की तरह ही सुलझाते हैं। हम ऐसे मुद्दों पर सार्वजनिक मंचों पर चर्चा नहीं करते हैं।
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जेपी नड्डा ने कहा था- आरएसएस एक वैचारिक मोर्चा है
मई में एक मीडिया साक्षात्कार में, जेपी नड्डा ने कहा कि भाजपा उस समय से आगे बढ़ी है जब उसे आरएसएस की आवश्यकता थी और अब वह सक्षम है और अपने काम खुद करती है। उन्होंने कहा था कि आरएसएस एक वैचारिक मोर्चा है और अपना काम खुद करता है। सुनील आंबेकर ने कहा कि भले ही लोग राजनीतिक लाभ के बारे में सोचकर संघ में शामिल होते हैं, लेकिन वे संगठन के साथ अपने जुड़ाव के कारण अपने आप ही अच्छा काम करना शुरू कर देते हैं। आंबेकर ने कहा कि कई लोग रोजाना अच्छा काम करने की इच्छा से आरएसएस में आते हैं।
 
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आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी सुनील आंबेकर ने बुधवार को कहा कि जमीनी स्तर पर ऐसी कोई मांग नहीं है कि संघ की शाखाओं में लड़के और लड़कियां एक साथ भाग लें और समाज इसकी मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी मांग की जाती है तो संघ मौजूदा ढांचे में जरूरी बदलाव करेगा।

'राष्ट्र सेविका समिति भी RSS जैसा कर रही काम'
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख (राष्ट्रीय प्रवक्ता) आंबेकर से जब एक समाचार संस्थान के कार्यक्रम में ये पूछा गया कि संगठन में महिलाएं कोई बड़ा पद क्यों नहीं संभालती हैं, तो उन्होंने कहा, जमीनी स्तर पर आरएसएस की शाखाएं केवल लड़कों के लिए हैं। लेकिन राष्ट्र सेविका समिति, एक महिला संगठन (आरएसएस का) 1930 के दशक से आरएसएस जैसा ही काम कर रही है। आरएसएस का मूल ढांचा शाखा है। यह ढांचा व्यक्ति निर्माण प्रक्रिया के लिए है।

'जरूरत पड़ी तो अपने ढांचे में आवश्यक बदलाव करेंगे'
उन्होंने कहा, मानव निर्माण और राष्ट्र निर्माण आरएसएस का मिशन है। इसलिए, शाखाओं में केवल पुरुष होते हैं, जबकि राष्ट्र सेविका समिति में महिलाएं (सदस्य के रूप में) होती हैं। जब किसी इलाके के निवासी कहते हैं कि लड़कियां और लड़के एक साथ खेल सकते हैं, तो हम अपने ढांचे में आवश्यक बदलाव करेंगे। लेकिन समाज ऐसा कुछ नहीं मांग रहा है।

वहीं मणिपुर की स्थिति पर बोलते हुए, आंबेकर ने कहा, यह एक गंभीर मामला है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी उस राज्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आरएसएस कार्यकर्ता शांति स्थापित करने के लिए वहां जमीन पर सक्रिय हैं। वे समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए प्रयास जारी हैं।

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