आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी सुनील आंबेकर ने बुधवार को कहा कि जमीनी स्तर पर ऐसी कोई मांग नहीं है कि संघ की शाखाओं में लड़के और लड़कियां एक साथ भाग लें और समाज इसकी मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी मांग की जाती है तो संघ मौजूदा ढांचे में जरूरी बदलाव करेगा।
'राष्ट्र सेविका समिति भी RSS जैसा कर रही काम'
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख (राष्ट्रीय प्रवक्ता) आंबेकर से जब एक समाचार संस्थान के कार्यक्रम में ये पूछा गया कि संगठन में महिलाएं कोई बड़ा पद क्यों नहीं संभालती हैं, तो उन्होंने कहा, जमीनी स्तर पर आरएसएस की शाखाएं केवल लड़कों के लिए हैं। लेकिन राष्ट्र सेविका समिति, एक महिला संगठन (आरएसएस का) 1930 के दशक से आरएसएस जैसा ही काम कर रही है। आरएसएस का मूल ढांचा शाखा है। यह ढांचा व्यक्ति निर्माण प्रक्रिया के लिए है।
'जरूरत पड़ी तो अपने ढांचे में आवश्यक बदलाव करेंगे'
उन्होंने कहा, मानव निर्माण और राष्ट्र निर्माण आरएसएस का मिशन है। इसलिए, शाखाओं में केवल पुरुष होते हैं, जबकि राष्ट्र सेविका समिति में महिलाएं (सदस्य के रूप में) होती हैं। जब किसी इलाके के निवासी कहते हैं कि लड़कियां और लड़के एक साथ खेल सकते हैं, तो हम अपने ढांचे में आवश्यक बदलाव करेंगे। लेकिन समाज ऐसा कुछ नहीं मांग रहा है।
वहीं मणिपुर की स्थिति पर बोलते हुए, आंबेकर ने कहा, यह एक गंभीर मामला है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी उस राज्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आरएसएस कार्यकर्ता शांति स्थापित करने के लिए वहां जमीन पर सक्रिय हैं। वे समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए प्रयास जारी हैं।