लोकतंत्र के चौथे और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में जाना जाने वाला मीडिया खासकर सोशल मीडिया वर्तमान में लोकतंत्र के लिए ही खतरा बनता जा रहा है। विदेशी मीडिया और देश की अंदरूनी राष्ट्र विरोधी ताकतें विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साइट्स का गलत इस्तेमाल कर भारत को खंडित करने और विश्व में भारत की छवि को धूमिल करने का कुचक्र रच रही हैं। भारत की फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ‘डिजिटल फोरेंसिक रिसर्च एंड एनालिटिक्स सेंटर’ (डीएफआरएसी) ने गहन अध्ययन के बाद यह जानकारी दी है कि देश की छवि को बिगाड़ने के लिए राष्ट्र विरोधी ताकतें सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए सोशल मीडिया को एक टूल के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं।
देश में किसान आंदोलन हो या शाहीन बाग मुद्दा, हरिद्वार की धर्म संसद का मामला हो या सीएए के खिलाफ धरना प्रदर्शन। सभी मुद्दों को विदेशी मीडिया में न केवल बेवजह तूल दिया गया, बल्कि देश के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक ने आंदोलन की पूरी कवरेज कर सरकार को कटघरे में खड़ा करने का भी काम किया। आज देश में राष्ट्र विरोधी ताकतों का एक बड़ा गैंग सक्रियता से सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों में फर्जी अकाउंट बनाकर गलत सूचनाओं को एकसाथ प्रेषित कर आमजन को भ्रमित करने का कार्य कर रहा है। गलत सूचनाओं से देश में माहौल खराब करने का भी काम जारी है। घर-घर तक अपनी पकड़ मजबूत बना चुके सोशल मीडिया को असामाजिक तत्वों का हथियार बनने से रोकने और गलत सूचनाओं के आदान-प्रदान पर नकेल कसने के लिए सरकार के साथ आमजन को भी आगे आना होगा, क्योंकि अक्सर माहौल खराब होना का कारण गलत सूचनाएं ही होती हैं।
बजट और आधी आबादी
समाज के हर वर्ग को बजट से अपने लिए कुछ उम्मीदें होती हैं। वर्तमान बजट को लेकर महिलाओं में उत्साह है। इसमें महिलाओं के लिए ‘सम्मान बचत पत्र योजना’ शुरू की गई है, जिसमें दो लाख तक की बचत पर 7.5 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। यह एकमुश्त रकम जमा करने वाली बचत योजना है, जो दो साल के लिए होगी।
जन धन के बाद शुरू की गई विशेष बचत योजना सामान्य परिवेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करेगी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत खाते में रखी जाने वाली रकम की सीमा 4.30 लाख से बढ़कर 9 लाख रुपये हुई है। बुजुर्ग महिलाओं, खासकर जो अकेली या किसी भी रूप में निशक्त हैं, उन्हें अवश्य राहत होगी। बच्चों और किशोरों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी की घोषणा हमारी बच्चियों के लिए भी लाभकारी होगी, जो पुस्तकों के अभाव में चाहकर भी ज्ञानोर्पाजन और आगे पढ़ाई जारी नहीं कर पाती हैं। आज महिलाओं की उम्मीदों को खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि पुरुष पैसा कमाकर महीने के शुरू में आय का एक तय हिस्सा उनके हाथ में रख देता है, जिसे महीने भर चलाने की जिम्मेदारी उनकी होती है। आज वह घर से बाहर निकलकर भी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में योगदान देने की पूरी पहल कर रही हैं, मगर अभी भी संपूर्णता का लक्ष्य अछूता है। कामकाजी महिलाओं को टैक्स में अधिक छूट की उम्मीद थी। वे टैक्स स्लैब बढ़ाकर 10 लाख करने की मांग कर रही थीं। हालांकि सबको खुश रखना संभव नहीं है। बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं, लेकिन एक सामान्य स्त्री की नजर से देखें तो घरेलू इस्तेमाल की चीजों से जीएसटी हटाया जाना और गैस की सब्सिडी को बरकरार रखना महिलाओं के हित में होता। चाहे वे दुनिया घूम लें या बड़े पदों पर आसीन हो जाएं पर रसोई आज भी उनकी प्राथमिकता है।
षड्यंत्र छोड़ समाधान ढूंढे पाकिस्तान
आज पड़ोसी देश पाकिस्तान की जो हालत है, उसके लिए वहां के लोग ही जिम्मेदार हैं। वे लोग धर्म और क्षेत्र के नाम पर एक-दूसरे के दुश्मन बन गए हैं। इससे भी भयानक सत्य यह है कि आजादी से अब तक पाकिस्तान हमें कमजोर करने के लिए आतंकवाद और अलगावाद परोसता आ रहा है, जबकि आतंकवाद का यह सांप आज उनके ही नागरिकों को डस रहा है। बीते दिनों पेशावर की एक मस्जिद में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। बेरोजगारी और भुखमरी से ग्रस्त वहां के नागरिकों के पास आज अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए भी पैसे नहीं हैं। पाकिस्तान में आटा, चीनी, चायपत्ती, चावल, गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल समेत अन्य जरूरी सामानों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। वास्तव में जो जैसा करता है, देर-सवेर उसे अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है।
यह बात जग जाहिर है कि पाकिस्तान में आज तक लोकतंत्र ने एक दिन भी चैन की सांस नहीं ली है और न ही वहां के हालात कभी सुधर पाए। आतंकवाद, अलगाववाद और सांप्रदायिक वैमनस्य वहां पूरी तरह से अपने पैर पसार चुका है। पाकिस्तान को फिर से अपने आपको स्थापित करने के लिए भारत के साथ मधुर और शांति पूर्ण संबंध बनाने होंगे, अन्यथा बर्बादी उसका भाग्य बन जाएगी। पाकिस्तान की सत्ता में बैठे नेताओं तथा अंध भक्त जनता को अब सद्बुद्धि की आवश्यकता है। अगर पड़ोसी मुल्क ने अब भी भारत के खिलाफ षड्यंत्र करने नहीं छोड़े तो आने वाला कल उसके लिए बहुत कठिन होने वाला है। पाकिस्तान को अपने हालात सुधारने के लिए भारत से विभिन्न योजनाओं पर बात करने की जरूरत है, ताकि घाटी और भारत में एक शांति पूर्ण वातावरण बन सके अन्यथा वर्तमान परिवेश में पाकिस्तान की स्थिति और अधिक दयनीय हो सकती है, जिसके लिए वहां के रणनीतिकार ही पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे और बेबस जनता ऐसे ही परेशान होती रहेगी।