रेलवे में नेत्र दिव्यागों के लिए आरक्षित एक प्रतिशत आरक्षण को दो हिस्सों में बांटने को लेकर चर्चा तेज हो रही है। ऐसे में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने रेलवे को नेत्र दिव्यांगों के लिए आरक्षित एक प्रतिशत आरक्षण को दो हिस्सों में बांटने पर कड़ी आपत्ति जताई है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस आरक्षण दृष्टिहीन और कम देखने वाले व्यक्तियों के लिए 0.5-0.5 प्रतिशत में बांटा नहीं जा सकता। इतना ही नहीं मामले में मंत्रालय ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ को एक पत्र भेजकर सलाह दी है कि ऐसा विभाजन 'विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016' का उल्लंघन है।
मामले में मंत्रालय ने जानकारी दी कि उसे पता चला है कि रेलवे की एक भर्ती प्रक्रिया में नेत्र दिव्यांगों के लिए तय 1 प्रतिशत आरक्षण को आधा-आधा बांटा गया। इसके लिए रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर मंत्रालय ने आपत्ति जताई है। पत्र में मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आरपीडब्ल्यूडी एक्ट, 2016 की धारा 34 के अनुसार, केंद्र सरकार की नौकरियों में कम से कम 4% आरक्षण दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अनिवार्य है। यह 4% आरक्षण चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें से एक श्रेणी'दृष्टिहीनता और कम देखने वाले लोगों के लिए है।
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इस दौरान मंत्रालय ने अपने पत्र में ये भी लिखा कि कानून में यह कहीं नहीं लिखा गया है कि किसी भी श्रेणी के भीतर आरक्षण को और बांटा जाए। इसलिए एक प्रतिशत आरक्षण को दृष्टिहीन और 'कम देखने वाले व्यक्तियों के बीच बांटना गैर-कानूनी है।
अब समझिए क्या है मंत्रालय की मांग?
बता दें कि रेलवे बोर्ड को लिखे पत्र में मंत्रालय ने कुछ अहम मागों पर जोर दिया है, इसके तहत मंत्रालय ने मांग की है कि इस ये एक प्रतिशत आरक्षण नेत्र दिव्यांग और कम देखने वाले लोगों की श्रेणी के लिए सामूहिक रूप से लागू हो। इसे दो हिस्सों में बांटने पर रोक लगे, इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। साथ ही मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह आरक्षण अविभाज्य माना जाए।
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रेलवे बोर्ड ने क्या दी प्रतिक्रिया?
ऐसे में जब सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने रेलवे बोर्ड को पत्र लिखा तो इसपर बोर्ड ने अपनी प्रतिक्रिया दी। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय के इस निर्देश को सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को भेज दिया गया है और उन्हें कहा गया है कि इस निर्देश का सख्ती से पालन करें।