लोकसभा द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम में संशोधन को अनुमति देने के एक दिन बाद सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि केंद्र सरकार इस कदम से भारत के नागरिकों को धोखा दे रही है। बता दें कि, सोमवार को लोकसभा ने आरटीआई अधिनियम में संशोधन को अनुमति दी थी।
इससे केंद्र को कार्यालय, वेतन, भत्ते और अन्य नियम और शर्तों की अवधि निर्धारित करने की अनुमति मिलेगी। इस संशोधन ने सूचना आयुक्तों की स्थिति को भी बदला है। मूल आरटीआई अधिनियम के अनुसार वह चुनाव आयुक्त के समान थे।
अन्ना हजारे ने कहा, 'किसी कानून का मसौदा तैयार करते समय यह उम्मीद की जाती है कि सरकार इसमें जनता की राय लेगी। यदि मसौदा और कानून दोनों को केवल सरकार बनाएगी तो ये लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है।' उन्होंने कहा, 'भारत को सूचना का अधिकार साल 2005 में मिला था लेकिन कानून में संशोधन कर सरकार देश की जनता को धोखा दे रही है।'
82 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे अपने गांव रालेगण सिद्दी में मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं हैं लेकिन यदि देश के लोग आरटीआई कानून की स्वायत्तता बनाए रखने के लिए सड़कों पर उतरते हैं तो वह उनका साथ देने के लिए तैयार हैं।