उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसा साधारण उपकरण तैयार करने की आवश्यकता थी जिसका इस्तेमाल ग्राहक दूध में मिलावट का पता लगाने के लिए कर सकें। एक ही समय में सभी मानकों की निगरानी करके दूध में मिलावट का पता लगाना संभव हो सकता है, वह भी बिना महंगे उपकरणों का इस्तेमाल किए हुए।
हमने तीन मशीन-लर्निंग एल्गोरिद्म का उपयोग किया है और सूचक स्ट्रिप्स के रंग को वर्गीकृत करने में उनकी पहचान क्षमता की तुलना की है। उन्होंने कहा कि हमने दूध में मिलावट का पता लगाने में 99.71 फीसदी सफलता हासिल कर ली है।
शोध टीम ने सबसे पहले अम्लता के संकेतक पीएच स्तर का पता लगाने के लिए सेंसर चिप पर आधारित सिद्धांत विकसित किया। उन्होंने नैनोसाइज्ड नायलॉन फाइबर से बने कागज जैसी सामग्री का उत्पादन करने के लिए इलेक्ट्रोस्पिनिंग नामक एक प्रक्रिया का उपयोग किया, जो तीन रंगों के संयोजन से भरा हुआ था।
पेपर हेलोक्रोमिक है जो अम्लता में परिवर्तन के जवाब में रंग बदलता है। शोधकर्ताओं ने एक प्रोटोटाइप स्मार्ट फोन-आधारित एल्गोरिदम विकसित किया है, जिसमें दूध में डुबकी के बाद सेंसर स्ट्रिप्स के रंग को फोन कैमरे में कैद कर लिया जाता है और यह डेटा पीएच रेंज में बदल जाता है।