दवा कंपनियों पर नियंत्रण के लिए समिति गठित
सरकार ने फार्मा कंपनियों द्वारा दवाओं और उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रलोभन देने के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर ली है। इस पर नकेल कसने के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो 90 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें देंगी। इसका गठन केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया के अनुरोध पर किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी के पॉल की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति दवा मार्केटिंग व्यवहार की समान संहिता (यूसीपीएमपी) से संबंधित विभिन्न मुद्दों की भी समीक्षा करेगी। इसमें फार्मा विभाग की सचिव एस अपर्णा, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन नितिन गुप्ता शामिल हैं और दवा विभाग के संयुक्त सचिव (नीति) सदस्य सचिव के तौर पर शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, 12 सितंबर को कार्यालय की ओर से एक ज्ञापन जारी किया गया है। इसमें लिखा है कि दवा विभाग ने फार्मा कंपनियों के लिए एक आचार संहिता यूसीपीएमपी भी लागू की है, जो एक जनवरी, 2015 से प्रभावी है।
लंबित मामलों पर होगी प्रतिदिन सुनवाई, शीर्ष अदालत ने नए मामलों को सूचीबद्ध करने के नियम में किया बदलाव
सुप्रीम कोर्ट ने नए मामलों को सूचीबद्ध करने के नियम में बदलाव किया है। इसके तहत मिश्रित मामले, जिन पर सुनवाई नहीं हो पाती है, उनको अगले दिन सुनने का नियम बनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में एक परिपत्र जारी किया है। इसके अनुसार जिन मिश्रित मामलों पर सुनवाई मंगलवार को नहीं हो पाएगी उनको अगले दिन बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। बुधवार के मामलों को अगले दिन बृहस्पतिवार के लिए।
इसी प्रकार जिन मामलों पर सुनवाई बृहस्पतिवार को नहीं हो पाएगी, उनको अगले सप्ताह मंगलवार के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। संबंधित पीठ उन मामलों पर विचार करेगी। सूत्रों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की अध्यक्षता में बीते मंगलवार को एक पूर्ण-न्यायालय बैठक का आयोजन हुआ था। इसमें लंबित मामलों के बोझ को कम करने और नए मामलों की लिस्टिंग सिस्टम जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।
दो अलग-अलग शिफ्ट में काम कर रहे हैं न्यायाधीश
नई प्रणाली के तहत प्रत्येक सप्ताह के सोमवार और शुक्रवार को 30 न्यायाधीशों को दो समूहों में बैठना होता है और प्रत्येक बेंच को नई जनहित याचिकाओं समेत 60 से अधिक मिश्रित मामलों पर सुनवाई करनी होती है। यह व्यवस्था भी की गई है कि मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार को जज तीन-तीन के समूह में बैठेंगे और पहले (सुबह के सत्र में) उन मामलों पर विस्तृत सुनवाई करेंगे, जो एक साल पुराने हैं। लंच के बाद न्यायाधीश दो-दो के समूह में बैठेंगे और पहले स्थानांतरित याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे। इसके बाद जनहित याचिकाओं समेत 20 से 30 ताजा मामलों पर सुनवाई करेंगे।