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देश में स्थिति ऑउट ऑफ कंट्रोल: कांग्रेस 

Sat, 12 Nov 2016 02:13 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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बड़े नोट बंदी से आम लोगों की परेशानियां और कालेधन को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आरोप पर कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने मीडिया से कहा कि देश में आर्थिक अव्यवस्था फैली है। सरकार के असंवेदनशील होने से स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल है। टैक्स देने वाले अपनी जमा रकम के लिए कतारों में खड़े होकर मामूली रकम पा रहे हैं जो गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विपक्ष का दायित्व निभाकर सरकार की जवाबदेही तय कराएगी। 
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कांग्रेस नेता ने अमित शाह पर कटाक्ष किया कि प्रवचन देने वाले ये भी बता दें कि लोकसभा चुनाव में कौन से पैसे का इस्तेमाल किया था। चेक से किस ट्रस्ट या संस्था ने सौ करोड़ का भुगतान किया वही बता दें। नोट बंद होंगे ये कुछ लोगों को पहले से पता था। कालेधन वाले लाइन में नहीं लगे हैं। अखबारों और सोशल मीडिया में 27 अक्तूबर से दो हजार के नोट बंद होने की जानकारी थी।

लिहाजा सरकार 20 अक्तूबर से 8 नवबंर के बीच उन लोगों की पड़ताल कर सार्वजनिक करे जिन्होंने पांच लाख से अधिक का सोना, विदेशी मुद्रा बदली है। सरकार स्विस बैंक की सूची जारी करे। पांच सौ करोड़ का कर्जा लेने और एमपीए होने वालों की सूची जारी करे। पिछले दो सालों में किन औद्योगिक घरानों के लोन माफ हुए सूची जनता के सामने लाएं।
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कांग्रेस कालेधन के खिलाफ है

congress rally
आनंद शर्मा ने कहा कि वित्त मंत्री और भाजपा अध्यक्ष सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों को गलत साबित करने के लिए भ्रामक तर्क दे रहे हैं। कांग्रेस कालेधन के खिलाफ है। सरकार ने अचानक नाटकीय अंदाज में पाबंदी तो लगा दी लेकिन नोट बदलने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई। वहीं भाजपा ने 23 जनवरी 2014 में जारी प्रेस नोट में तत्कालीन यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी। तब भाजपा का तर्क था कि करेंसी बदलने के फैसले से गरीब तबाह हो जाएंगे। सरकार ने कोई पाबंदी नहीं लगाई महज पांच सौ और हजार की कुछ सिरीज के नोट वापस लिए थे। 

आनंद शर्मा ने मीडिया से कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली जी का फोन आया था उन्होंने तर्क दिया कि अगर पहले से समय देकर घोषणा होती तो आतंकवादी और कालेधन के अपराधी सतर्क हो जाते और नोट बदल लेते। मैं उनके तर्क से सहमत नहीं हूं क्योंकि परेशानी आम लोगों को हैं। भारत की अर्थव्यवस्था कैश और टैक्स देने वाले बचत खाताधारकों से चलती है। जबकि मेहनतकश, दिहाड़ी मजदूर, किसान, कामगार को सरकार ने अपराधी बना दिया है। दुनिया में कोई भी देश अपनी करेंसी बंद करने से काफी पहले इसकी सूचना जारी करते हैं। 
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