अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, ‘आज हम सितंबर में हुए कम्यूनिकेशन्स कम्पैटिबिलिटी एडं सिक्योरिटी एग्रीमेंट (सीओएमसीएएसए) समझौते को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।’ वार्ता के दौरान दोनों देशों ने सीओएमसीएएसए पर हस्ताक्षर किए थे जो भारत को आधुनिक सैन्य हार्डवेयर प्राप्त करने की अनुमति देता है। सीतारमण ने टू प्लस टू बैठक को ऐतिहासिक घटनाक्रम बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक विचारविमर्श का आधार तैयार हुआ।
उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली में सितंबर में संपन्न और अक्टूबर में सिंगापुर में संपन्न टू प्लस टू द्विपक्षीय बैठकें सकारात्मक और सार्थक रहीं। मैटिस के साथ बैठक की शुरूआत में सीतारमण ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास तथा रक्षा साझेदारी में भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नई अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को जो महत्व दिया गया है उससे वह उत्साहित हैं। सीतारमण ने कहा, ‘भारत अमेरिका रक्षा संबंधों की मजबूत नींव वर्षों में पड़ी है। भारत अमेरिका को रक्षा के क्षेत्र में अहम साझेदार के रूप में देखता है।’ साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर सहयोग है, इसके अलावा रक्षा, वैज्ञानिक, सह-विनिर्माण और सह-विकास तथा औद्योगिक स्तर पर भी सहयोग का स्तर अच्छा है।
यह विश्वास जताते हुए कि द्विपक्षीय वार्ताओं से दोनों देशों के बीच बातचीत और साझेदारी को और तेजी मिलेगी, रक्षा मंत्री ने कहा कि संबंध बहुत मजबूत बने हुए हैं। सीतारमण ने कहा कि दोनों देशों के बीच हाल में हुई बैठकों ने सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ने की दोनों देशों की परस्पर इच्छा को रेखांकित किया है। उच्च-स्तरीय वार्ताएं द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और बेहतरी के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साथ मिलकर काम करने की परस्पर इच्छा को दर्शाती हैं।
रक्षा मंत्री ने भारत की संवेदनशीलता पर ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, ‘खासतौर पर पिछले तीन चार वर्षों में हमने उल्लेखनीय प्रगति की है। साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हमारे संबंधों को दोनों देशों में मजबूत राजनीतिक तथा जन समर्थन मिल रहा है। आपसी विश्वास बढ़ रहा है तथा रक्षा साझेदारी में भरोसा भी है।’