2002 के नरोदा पाटिया नरसंहार मामले की मुख्य आरोपी माया कोडनानी के बचाव में दिया गया अमित शाह का बयान विश्वसनीय नहीं है और उस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एक विशेष अदालत में यह बात कही है।
पिछले साल सितंबर में शाह, कोडनानी के बचाव में गवाह के रूप में पेश हुए थे। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें पेशी की अनुमति दी जाए ताकि वह कोडनानी के उस पक्ष में अपना बयान दे सकें कि वह मौका-ए-वारदात के दौरान उपस्थित नहीं थीं और उस वक्त वह विधानसभा में मौजूद थीं। इसके बाद वर्ष 2002 में जिस दिन दंगा भड़का (नरोदा गाम में नहीं) उस दिन वह सोला सिविल अस्पताल में थीं।
विशेष सरकारी वकील गौरांग व्यास ने बुधवार को न्यायाधीश एमके दवे को बताया कि कोडनानी के बचाव में शाह के बयान का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यह काफी समय बीत जाने के बाद दिया गया।
उन्होंने कहा, ‘शाह का बयान विश्वसनीय नहीं है, क्योंकि किसी अन्य आरोपी ने सोला सिविल अस्पताल में कोडनानी की मौजूदगी का उल्लेख नहीं किया।’ मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। शाह ने अदालत को बताया था कि वह गांधीनगर में गुजरात विधानसभा में कोडनानी से मिले थे और बाद में दंगा वाले दिन वह उनसे अहमदाबाद में सोला सिविल अस्पताल में मिले थे।
यह है मामला :
नरोदा पाटिया नरसंहार मामला साल 2002 में सांप्रदायिक दंगे के उन नौ मामलों में से एक है, जिनकी जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी कर रही है। नरोदा पाटिया दंगा मामले में कोडनानी को 28 साल की जेल हुई थी जिसमें 96 लोग मारे गए थे। हालांकि इस साल अप्रैल में गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।