कालेधन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (
एसआईटी) ने जांच एजेंसियों से कहा है कि वे देश में
किप्टोकरेंसी के चलन और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाएं। इससे गैर कानूनी लेनदेन हो रहा है। अधिकारियों ने बताया, हाल में एसआईटी ने राजधानी में बैठक की और आयकर विभाग, ईडी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को आदेश दिया कि वे बिटक्वॉइन जैसी गैरकानूनी वर्चुअल मुद्रा पर रोक लगाएं।
इंटरनेट के जरिये इनका सीमा पार से भी लेन-देन हो रहा है। पैनल एक रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है जो जल्द सरकार को सौंपी जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार को इस वर्चुअल करेंसी के लिए नियम-कानून बनाकर रेगुलेट करने का अंतिम अधिकार है। एसआईटी इस विषय पर रिपोर्ट मुहैया कराएगी। ज्ञात हो कि एक फरवरी को बजट भाषण में क्रिप्टोकरेंसी को गैरकानूनी करार दिया था। वहीं आरबीआई कम से कम तीन बार वर्चुअल मुद्रा में निवेश करने वालों को चेतावनी जारी कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में कालेधन के खिलाफ यह एसआईटी बनाई थी। इसके अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस एमबी शाह हैं।
वर्चुअल करेंसी से ड्रग्स और कालेधन का धंधा
बैठक के दौरान एनसीबी ने एसआईटी को बताया कि पिछले दो साल में क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली ड्रग्स तस्करी के चार मामले पकड़े गए हैं। वहीं आयकर विभाग ने पैनल को पिछले साल देश भर में बिटक्वाइन से होने वाले लेन-देन के बारे में सूचित किया। बैठक के आरबीआई की ओर से तैयार एक रिपोर्ट भी देखी गई।