केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने सोमवार को आरोप लगाया कि डीएमके सरकार ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ प्रक्रिया का विरोध कर रही है ताकि भ्रष्टाचार और हालिया कैश-फॉर-जॉब घोटाले से जनता का ध्यान हटाया जा सके। उन्होंने कहा कि डीएमके ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर एक राजनीतिक नाटक रचा है।
SIR प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से पूरी हो
मुरुगन ने कहा कल डीएमके की सहयोगी पार्टी एमडीएमके के प्रमुख वाइको ने खुद कहा कि 75 लाख फर्जी वोटर हैं। अगर ऐसा है तो क्या हम इन नामों के साथ चुनाव का सामना कर सकते हैं? क्या इससे यह साबित नहीं होता कि वोटर लिस्ट अपडेट करना जरूरी है? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग के साथ सहयोग करना चाहिए ताकि SIR प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से पूरी हो सके। उन्होंने कहा चुनाव से पहले यह प्रक्रिया जरूरी है, ताकि असली वोटर वंचित न हों और मृत या डुप्लीकेट वोट हटाए जा सकें।
मुरुगन ने सवाल उठाया कि डीएमके SIR का विरोध क्यों कर रही है, जबकि इसमें राज्य सरकार के ही अधिकारी शामिल हैं। अगर डीएमके विशेष गहन पुनरीक्षण पर भरोसा नहीं करती, तो क्या वह अपने ही सरकारी कर्मचारियों पर विश्वास नहीं करती?
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अल्पसंख्यकों के नाम कटे जाने पर डी सफाई
अल्पसंख्यकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के आरोपों पर मुरुगन ने कहा चुनाव आयोग बिना अनुमति किसी का नाम नहीं हटा सकता। एसआईआर प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई है, फिर ऐसे आरोप क्यों? वोटर वोटर होते हैं अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक का कोई भेद नहीं। उन्होंने कहा कि जब भी डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं, वह लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे और बहाने खड़े करती है। मुरुगन ने कहा इस बार भी सरकार कैश-फॉर-जॉब घोटाले से बचने के लिए मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर विवाद खड़ा कर रही है।
विजय ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठाया सवाल
अभिनेता-राजनेता और तमिलागा वेट्री कजगम (टीवीके) प्रमुख विजय ने चिंता जताई कि बिहार में एसआईआर के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायतें आई थीं और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। उन्होंने सवाल किया कि जब पहली चरण की गड़बड़ियों पर सफाई नहीं दी गई, तो दूसरी चरण की प्रक्रिया कैसे शुरू की जा सकती है?
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उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु में लगभग 6.36 करोड़ मतदाता हैं। इतनी बड़ी संख्या की जांच सिर्फ 30 दिनों में कैसे संभव है?' विजय ने यह भी कहा कि कई विपक्षी दलों ने अल्पसंख्यक वोटरों को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई है, और ऐसी चिंताओं को दूर करने की कोई ठोस गारंटी नहीं दी गई है।