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SC: भीड़ हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट का हाईकोर्ट के आदेश में दखल से इनकार

Mon, 03 Nov 2025 01:39 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस मामले में 15 जुलाई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि भीड़ हिंसा का हर मामला अलग होता है और उनकी जनहित मुकदमेबाजी के तहत निगरानी नहीं की जा सकती।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) का शिकार हुए लोगों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता को उत्तर प्रदेश सरकार से बात करने को कहा था। 
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उच्च न्यायालय के आदेश में दखल से इनकार
जमीयत उलेमा ए हिंद ने याचिका दायर कर तहसीन पूनावाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार उन्हें लागू करने में विफल रही। इसे लेकर इस मामले में 15 जुलाई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि भीड़ हिंसा का हर मामला अलग होता है और उनकी जनहित मुकदमेबाजी के तहत निगरानी नहीं की जा सकती। हालांकि उच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रभावित पक्ष संबंधित सरकारी प्राधिकरण के पास जाकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का लागू करने की मांग कर सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश
तहसीन पूनावाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ हिंसा को रोकने के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनके मुताबिक-

मॉब लिंचिंग और गौरक्षकों द्वारा की जाने वाली हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया, जो पुलिस अधीक्षक के पद से नीचे का नहीं होगा।
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दिशा-निर्देश तय करने की तारीख से तीन सप्ताह की अवधि के भीतर, राज्य सरकारों को उन प्रभावित जिलों की पहचान करनी होगी जहां लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं।
 
सोशल मीडिया पर लोगों को भड़काने और फर्जी खबरें फैलाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत स्वचालित एफआईआर  दर्ज करने का निर्देश।

राज्य सरकारों को सीआरपीसी की धारा 357 ए के तहत भीड़ हिंसा पीड़ित मुआवजा योजना तैयार करने का निर्देश 

भीड़ हिंसा के मामलों की सुनवाई प्रत्येक जिले में फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने और सुनवाई 6 महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश।


 
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