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SIR in Bengal: एसआईआर पर जागरूकता फैलाने में जुटे अल्पसंख्यक संगठन और इमाम; मुस्लिमों को मिल रही मदद

Mon, 10 Nov 2025 03:10 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

SIR Form Awareness Drive West Bengal: पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक संगठनों और इमामों ने मुसलमानों की मदद के लिए एसआईआर फॉर्म जागरूकता मुहिम शुरू की है। मस्जिदों से लोगों को शांति और सावधानी से फॉर्म भरने की अपील की जा रही है।
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मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर बढ़ती चिंता के बीच अल्पसंख्यक संगठनों, मस्जिद समितियों और इमामों ने मुसलमानों की मदद के लिए एक राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किया है।लगभग 40 हजार मस्जिदों से इमाम लोगों से शांत रहने, सही तरीके से फॉर्म भरने और अफवाहों से बचने की अपील कर रहे हैं।

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मस्जिदों में बन रहे ‘हेल्प डेस्क’, इमाम खुद कर रहे मार्गदर्शन
कोलकाता की रेड रोड नमाज के प्रमुख इमाम काजी फजलुर रहमान ने कहा इमामों की जिम्मेदारी सिर्फ मिंबर तक सीमित नहीं है। हम लोगों को घबराने के बजाय प्रक्रिया समझा रहे हैं। मस्जिद समितियां फॉर्म भरने में मदद कर रही हैं ताकि कोई गलती न हो।

एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हुई है, जिसमें 80,000 से ज्यादा बूथ-लेवल अधिकारी घर-घर जाकर दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। यह अभियान 4 दिसंबर तक चलेगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।
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‘इतने कम समय में 10 करोड़ लोगों की जांच संभव नहीं’
कोलकाता की नक्खोदा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक कासमी ने चेतावनी दी कि इतने कम समय में यह काम करना संभव नहीं है और इससे हैरानी व उत्पीड़न की स्थिति बन सकती है। उन्होंने कहा सरकार का काम लोगों की मदद करना है, परेशान करना नहीं। गरीब और दस्तावेजविहीन परिवार पहले से ही तनाव में हैं। मस्जिदों में अब ट्रेनिंग सेशन और सहायता शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां लोगों को फॉर्म भरने और दस्तावेज़ जमा करने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।

22 जिलों में 200 से ज्यादा कैंप
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी के नेतृत्व में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने 22 जिलों में 200 से ज्यादा कैंप और व्हाट्सऐप हेल्पलाइन शुरू की हैं। चौधरी ने बताया हमारा उद्देश्य है कि लोग गलती से फॉर्म गलत न भरें और डुप्लिकेट एंट्री से बचें। यह गैर-राजनीतिक अभियान है।

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भय का माहौल बन रहा है’
ऑल बंगाल माइनॉरिटी यूथ फेडरेशन के महासचिव मुहम्मद कमरुज़्ज़मां ने कहा कि संगठन रोजाना 500 से अधिक कैम्प चला रहा है। अधिकतर लोग फॉर्म में गलती करने से डर रहे हैं। हम उन्हें भरोसा दिला रहे हैं कि जिनके पास वैध दस्तावेज़ हैं, उनका वोट सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि महिला मतदाताओं, खासकर विधवाओं या अकेली महिलाओं के लिए फॉर्म भरना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

बंगाल में मुस्लिम मतदाता: चुनावी समीकरण
पश्चिम बंगाल में 30% से अधिक मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं, जो लगभग 100 विधानसभा सीटों में निर्णायक प्रभाव रखते हैं। इसलिए SIR प्रक्रिया राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है। टीएमसी ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया से जुड़ी डर और चिंता के कारण 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि भाजपा ने इसे राजनीतिक नाटक बताया है।

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