पर्यावरण को बचाने के लिए भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पर्यावरण मंत्रालय एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने जा रहा है। इसमें सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पाद के निर्माण, आयात, निर्यात और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा। हालांकि सरकार के अहम फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। थर्मोफॉर्मर्स एंड एलाइड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हुए दो टूक कहा है कि सरकार ने उनके उत्पादों के लिए कायदे तय किए बगैर पूरा प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन मल्टी लेयर्ड पैकेजिंग को छूट दे दी।
एसोसिएशन का कहना है कि 75 माइक्रोन से अधिक के एचडीपीई कैरी बैग (दिसंबर 2022 तक 100 माइक्रॉन से अधिक होना है) को भी छूट दी गई है। ये भी सिंगल यूज प्लास्टिक हैं। पेय कंपनियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 200 मिलीलीटर से अधिक की पीईटी बोतलों को भी छूट की सूची में रखा गया है। मगर अफसोस है कि सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के सख्त प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाले उद्योग पर रोक लगा दी, जबकि हकीकत में उनके उत्पाद की रीसाइक्लिंग संभव है। सरकार ने नियमों के तहत उनके भारी उत्पादों के विनिर्माण, बिक्री, वितरण और भंडारण पर रोक लगा दी है, जबकि सिंगल यूज प्लास्टिक के पूरे कचरे में उनकी हिस्सेदारी 1.5 फीसदी है।
एसोसिएशन का कहना है कि हमारा कहना केवल यह है कि जिस तरह सरकार ने दूसरी श्रेणियों में छूट के लिए कायदे तय किए हैं, वैसे ही कायदे हमारे लिए भी बनाए ताकि हम भी छूट हासिल कर सकें। हमारे सभी उत्पादों की रीसाइक्लिंग संभव है। सरकार हमारे लिए भी छूट के लिए नियम बनाए। जैसे सख्त प्लास्टिक प्लेट और ट्रे 150 माइक्रोन से कम या पांच ग्राम से कम वजन की न हों।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मल्टी लेयर्ड पैकेजिंग को इसलिए मंजूरी दी गई है क्योंकि इनकी भंडारण की अवधि होती है। नए नियमों के तहत उन्हें भी तीन साल के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक की 30 फीसदी रीसाइक्लिंग करनी होगी। जिनको रीसाइकल नहीं किया जा सकता है, उन्हें बिजली या सड़क बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। आज हम हर रोज प्लास्टिक खा रहे हैं, पी रहे हैं, सांस ले रहे हैं। कई साल से हमने वन्यजीव पर यह खतरा पैदा किया है। अब प्लास्टिक हमारे खून में घुल गया है। प्लास्टिक सिर्फ कूड़ा नहीं होता है बल्कि यह जहरीला रसायन होता है, इससे हमें काफी नुकसान पहुंचता है, लिहाजा इसे रोकने के लिए बड़ा कदम उठाने की जरूरत है। औसतन हर भारतीय एक साल में 10 किलोग्राम प्लास्टिक का इस्तेमाल करता है। लिहाजा हर साल 35 लाख टन घरेलू प्लास्टिक का कचरा पैदा करते हैं, जिसकी वजह से कूड़े का अंबार लगता है
केंद्र सरकार के फैसले के बाद प्लास्टिक की स्ट्रॉ, प्लास्टिक की पन्नी में लिपटी टॉफी, प्लास्टिक की पैकिंग में पैक मिठाई के डिब्बे पर प्रतिबंध लग जाएगा। दरअसल पीएम मोदी ने चार साल में चरणबद्ध तरीके से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध की बात कही थी। इसी दिशा में सरकार ने यह पहला अहम कदम उठाया है। तकरीबन 19 प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वे सारे उत्पाद जो सिर्फ प्लास्टिक के बने होते हैं और सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल किए जाते हैं उस पर एक जुलाई से प्रतिबंध लगा दिया गया है।