यहां के लोगों की मुख्य खासियत है कि वह एक दूसरे को खास धुन और आवाज से बुलाते हैं। कॉन्गथॉन्ग और उसके आसापास के गांवों में बच्चे के जन्म के बाद उनकी मां एक खास धुन बनाती है, जिसके बाद पूरी जिंदगी बच्चों को उसी धुन से पुकारा जाता है। ऐसा नहीं है कि लोगों के वास्तविक नाम नहीं होते, उनके वास्तविक नाम भी होते हैं, लेकिन कुछ ही परिस्थितियों में उन्हें उनके वास्तविक नाम से पुकारा जाता है।