ओडिशा सरकार और सिंगापुर के संस्थानों के बीच कौशल विकास, हरित ऊर्जा और औद्योगिक पार्कों के विकास समेत विभिन्न क्षेत्रों में आठ समझौते हुए हैं। शुक्रवार को सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन शनमुगरत्नम, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद षणमुगरत्नम और माझी के नेतृत्व में दोनों पक्षों के बीच बंदरगाह, अक्षय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, सूचना प्रौद्योगिकी, डाटा सेंटर, संस्कृति और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों पर द्विपक्षीय चर्चा हुई।
अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा में कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को और बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा विभाग और सिंगापुर के आईटीई शिक्षा सेवाओं (आईटीईईएस) के बीच समझौता हुआ।
अक्षय ऊर्जा, हाइड्रोजन उत्पादन, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और माइक्रोग्रिड में अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाने के लिए आईआईटी भुवनेश्वर, ग्रिडको लि. और सिंगापुर के नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
सिंगापुर की ऊर्जा और शहरी विकास कंपनी सेम्बकॉर्प और राज्य सरकार के बीच एक समझौता हुआ। इसके तहत सेम्बकॉर्प की भारतीय सब्सिडियरी सेम्बकॉर्प ग्रीन हाइड्रोजन इंडिया ओडिशा में 7.20 लााख टन क्षमता की संयंत्र लगाएगी। इससे 2000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इससे पहले राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम से बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात की और दोनों नेताओं के बीच सेमीकंडक्टर, डिजिटलीकरण, कौशल, कनेक्टिविटी जैसे कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। द्विपक्षीय संबंधों पर जोर देते हुए थर्मन ने कहा, सिंगापुर भारत में सबसे बड़ा निवेशक है और दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध भी मजबूत हैं, जो आगे भी बढ़ते रहेंगे।
थर्मन ने कहा, हम अब भारत के साथ अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत करने के साथ एक नए पथ पर हैं। हम अपने मौजूदा सक्रिय संबंधों से परे उन्नत विनिर्माण और नेट जीरो औद्योगिक पार्कों के साथ-साथ नए उद्योगों के कौशल पर सहयोग करने पर काम कर रहे हैं। सिंगापुर भारत की विकसित देश बनने की महत्वाकांक्षा में निवेश कर रहा है। पांच दिवसीय भारत यात्रा पर आए शनमुगरत्नम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी बातचीत की। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री से मुलाकात से पहले उन्होंने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को शृद्धांजलि अर्पित की।
भारत स्वाभाविक साझेदार: थर्मन
राष्ट्रपति थर्मन ने भारत को अपना स्वाभाविक साझेदार बताया। 60 साल पहले पहली मिली आजादी को याद करते हुए राष्ट्रपति थर्मन ने कहा कि हम कभी नहीं भूलेंगे कि भारत 1965 में सिंगापुर की स्वतंत्रता को मान्यता देने वाले पहले कुछ देशों में से एक था और तब से हमारे संबंध तेजी से बढ़े हैं। छोटे देश सिंगापुर और बड़े देश भारत के बीच यह स्वाभाविक साझेदारी है।
वित्त मंत्री सीतारमण से मुलाकात
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने थर्मन से मुलाकात की। द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की। वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, सिंगापुर राष्ट्रपति से मिलकर गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। भारत सिंगापुर के साथ अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को महत्व देता है। उनकी यह यात्रा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगी, जो इसकी 60वीं वर्षगांठ का प्रतीक है।
राजनयिक संबंधों के 60 वर्ष पूरे होने पर विशेष लोगो का अनावरण
भारत और सिंगापुर ने अपने राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मनाने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू और सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन ने विशेष स्मारक लोगो का अनावरण किया। यह लोगो दोनों देशों के बीच स्थायी संबंधों का प्रतीक बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें भारत और सिंगापुर के झंडों के रंगों के साथ-साथ भारत का राष्ट्रीय फूल कमल और सिंगापुर का आर्किड शामिल हैं। लोगो में 60 अंक दोनों देशों के द्विपक्षीय इतिहास में महत्वपूर्ण मील के पत्थर को दर्शा रहा है।