केंद्रीय कृषि मंत्री और ग्रामीण विकास शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 'एक देश, एक चुनाव' 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से इस प्रस्ताव का समर्थन करने का आह्वान किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी पत्रिका 'पांचजन्य' की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चुनाव के समय पूरी सरकारी मशीनरी ठप हो जाती है और बार-बार चुनाव होने से सरकारों के लिए जनहित में फैसले लेने में बड़ी बाधा उत्पन्न होती है।
'चुनाव की वजह से काम होता है प्रभावित'
संयुक्त संसदीय समिति की जांच के दायरे में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'हमारे संविधान निर्माताओं ने हर पांच साल में चुनाव कराने का प्रावधान किया था, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि अनुच्छेद 356 का इतनी बार दुरुपयोग किया जाएगा। 1968 तक चुनाव एक साथ होते थे, क्योंकि 1966 तक हर जगह कांग्रेस की सरकारें थीं। जब दूसरी पार्टियां सत्ता में आने लगीं, तो उन्हें गिरा दिया गया।' 'इस समय हर समय कोई न कोई चुनाव होता रहता है। अभी दिल्ली में चुनाव है, फिर बिहार में। राजनीतिक दल 365 दिन सिर्फ चुनाव की तैयारी में लगे रहते हैं, वे जनहित में काम नहीं कर पाते।
'आज के हालात को देखते हुए एक साथ चुनाव एक उचित कदम है'
पिछले साल झारखंड में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के चुनाव प्रभारी रहे शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'कृषि मंत्री को अपना काम छोड़कर राज्य के चुनाव पर ध्यान देना पड़ता है...इससे कितना समय बर्बाद होता है।' उन्होंने कहा, 'क्या देश में चुनाव के अलावा कुछ नहीं होना चाहिए? लगातार होने वाले ये चुनाव भारत के विकास में सबसे बड़ी बाधा हैं। आज के हालात को देखते हुए यह (एक साथ चुनाव) एक उचित कदम है।'
'लगातार चुनाव देश के लिए एक आपदा बन गए हैं'
लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का कई दलों की तरफ से विरोध किए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सभी दलों को इस पर सहमत होना चाहिए क्योंकि यह कदम राष्ट्रहित में है। 'कोई भी देशभक्त जो राष्ट्रहित में सोचता है, उसे यह एहसास होगा कि लगातार चुनाव देश के लिए एक आपदा बन गए हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, 'अगर चुनाव पांच साल में एक बार होते हैं, तो लोग भी उत्साहित होंगे।'
दिल्ली में इस बार भाजपा जीतेगी- शिवराज सिंह चौहान
उन्होंने सुझाव दिया, 'यह लोगों की मांग है। लोगों को एक साथ चुनाव कराने की शपथ लेनी चाहिए, संगठनों को इसके समर्थन में प्रस्ताव पारित करना चाहिए।ट उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता परिपक्व हैं और वे विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ होने पर भी अलग-अलग पार्टियों को वोट देते हैं। उन्होंने ओडिशा का उदाहरण दिया। वहीं दिल्ली का जिक्र करते हुए, जहां 5 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं, शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास जताया कि इस बार भाजपा जीतेगी।