सिक्किम हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य की उन महिलाओं को बड़ा झटका दिया है, जिन्होंने राज्य के बाहर के पुरुषों से शादी की है। अदालत ने कहा कि ऐसी महिलाओं की संतानें अपनी मां की पैतृक संपत्ति पर अधिकार नहीं जता पाएंगी और न ही उन्हें पहचान प्रमाण पत्र, यानी सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिफिकेशन (सीओआई) जारी किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2018 में सिक्किम सरकार की ओर से जारी एक अधिसूचना से शुरू हुआ था। इस नियम के तहत प्रावधान किया गया था कि अगर कोई सिक्किमी महिला किसी गैर-सिक्किमी पुरुष से शादी करती है, तो उसके बच्चों को राज्य के विशेष अधिकारों से वंचित रखा जाएगा। पुष्पा मिश्रा और करीब 100 अन्य महिलाओं ने इस नियम को भेदभावपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 यानी समानता और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने मांग की थी कि उनके बच्चों को भी सरकारी नौकरियों, संपत्ति के उत्तराधिकार और पहचान प्रमाण पत्र का लाभ मिलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्या-क्या कहा?
जस्टिस मीनाक्षी मदन राय की पीठ ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सिक्किम की संवैधानिक स्थिति भारत के अन्य राज्यों से अलग है। कोर्ट ने अनुच्छेद 371एफ का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 1975 में भारत में विलय के समय सिक्किम के जो पुराने कानून प्रभावी थे, वे आज भी सुरक्षित और लागू हैं।
कोर्ट ने सिक्किम सब्जेक्ट रेगुलेशन, 1961 का जिक्र करते हुए कहा कि एक सिक्किमी महिला, गैर-सिक्किमी व्यक्ति से विवाह के बाद अपने बच्चों के लिए वह समान विषय की स्थिति बरकरार नहीं रख सकती। कोर्ट के अनुसार, ऐतिहासिक और कानूनी कारणों के आधार पर किया गया यह वर्गीकरण भेदभाव नहीं माना जा सकता।
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राहत की एक छोटी किरण
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि भले ही ये बच्चे पहचान प्रमाण पत्र के हकदार न हों, लेकिन वे रेसिडेंशियल सर्टिफिकेट, यानी निवास प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इसके जरिए उन्हें शिक्षा और राज्य की कुछ बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलता रहेगा, लेकिन वे पूर्ण संपत्ति अधिकार या सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता का दावा नहीं कर पाएंगे। जस्टिस राय ने टिप्पणी की कि यह मुद्दा नीति निर्धारण से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि अगर इस व्यवस्था में कोई बदलाव करना है, तो वह विधायी प्रक्रिया के जरिए ही संभव है, न्यायपालिका इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।