मालदा में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में एक अप्रैल को न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया था। इस मामले की जांच कर रही एनआईए ने रविवार को कांग्रेस प्रत्याशी सईम चौधरी और उनके छह साथियों को हिरासत में लिया है। साथ ही, आईएसएफ नेता गुलाम रब्बानी को भी गिरफ्तार किया गया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच मालदा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रविवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सात लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें मोथाबारी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी सईम चौधरी भी शामिल हैं। इसके साथ ही, जांच एजेंसी ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के एक पंचायत सदस्य को भी गिरफ्तार किया है।
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चुनाव प्रचार के दौरान हुई कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई उस समय हुई जब कांग्रेस प्रत्याशी सईम चौधरी अपने समर्थकों के साथ अलीनगर पंचायत क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एनआईए की टीम अचानक वहां पहुंची और सईम चौधरी व उनके छह साथियों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक अप्रैल को हुई उस घटना से जुड़ा है जिसने पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। दरअसल, मालदा में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) यानी मतदाता सूची के विशेष सुधार कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया था। आरोप था कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।
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इतना ही नहीं, इस दौरान वहां मौजूद सात न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बनाए रखा गया। इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। इस घटना को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया और बंगाल प्रशासन को जमकर फटकार लगाई थी।
जांच के दायरे में कई संगठन
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच की जिम्मेदारी एनआईए को सौंपी है। जांच अधिकारियों के मुताबिक,आईएसएफ के ग्राम पंचायत सदस्य गुलाम रब्बानी को गिरफ्तार किया गया है। रब्बानी की गिरफ्तारी एआईएमआईएम सदस्य मोफक्करुल इस्लाम से हुई पूछताछ के आधार पर हुई है, जिसे पहले राज्य पुलिस ने पकड़ा था। एनआईए सूत्रों का कहना है कि रब्बानी को कोलकाता ले जाया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि उससे पूछताछ के बाद इस सुनियोजित घेराव के पीछे के बड़े चेहरों का पर्दाफाश हो सकेगा।