प्रेम सिंह तमांग, सीएम, सिक्किम
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सिक्किम सरकार ने राज्य की 12 वंचित जातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जा दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए उनकी जातीय (एथ्नोग्राफिक) रिपोर्टों को अंतिम रूप दे दिया है। शनिवार को मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने इस संबंध में राज्य उच्चस्तरीय समिति (एसएचएलसी) की अंतिम समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक राजधानी गंगटोक स्थित सम्मान भवन में आयोजित की गई। इसमें उन 12 जातियों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पक्षों पर तैयार विस्तृत रिपोर्टों की समीक्षा की गई, जिन्हें अब तक जनजातीय मान्यता नहीं मिल सकी है।
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12 समुदायों में कौन-कौन शामिल?
इन 12 समुदायों में भुजेल, गुरूंग, जोगी, खास, किरात राय, किरात देववन याखा, माझी, मंगर, नेवार, सन्यासी, सुनुवार (मुखिया) और थामी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, आज सम्मान भवन में सिक्किम की 12 वंचित जातियों की जातीय रिपोर्टों पर अंतिम समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। ये रिपोर्टें भारत सरकार द्वारा निर्धारित सभी मानकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं और पूर्व में उठाए गए सभी सवालों का जवाब देने में सक्षम हैं।
सरकार केंद्र को जल्द सौंपेगी- सीएम तमांग
मुख्यमंत्री ने इन रिपोर्टों को हमारी साझा विरासत की जीवंत गवाही बताते हुए विश्वास जताया कि इन्हें जल्द ही भारत सरकार को सौंपा जाएगा, जिससे इन जातियों को एसटी दर्जा दिलाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो सकेगी।गौरतलब है कि यह उच्चस्तरीय समिति वर्ष 2024 के अंत में गठित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता मानवविज्ञान सर्वेक्षण के निदेशक बीवी शर्मा कर रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर महेन्द्र पी लामा इसके उपाध्यक्ष हैं। समिति ने कई महीनों तक समुदायों से संवाद, फील्ड रिसर्च और संस्थागत समीक्षा करते हुए यह दस्तावेज तैयार किया है।
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'वर्षों पुरानी मांग को पूरा करेगी ये पहल'
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने आशा जताई कि यह पहल न केवल सिक्किम की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करेगी बल्कि 'विकसित भारत 2047' की राष्ट्रीय सोच को भी मजबूत करेगी। राज्य सरकार के इस कदम से इन समुदायों में फिर से आशा जगी है और समावेशन व समानता की दिशा में यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।