सेना ने पूर्वी सिक्किम में मंगलवार को आए हिमस्खलन के बाद बुधवार सुबह फिर से बचाव अभियान चलाया। किसी के मलबे में दबे होने की आशंका के चलते बीआरओ प्रोजेक्ट स्वास्तिक ने एनडीआरएफ टीम के साथ बचाव अभियान चलाया, जो करीब तीन बजे तक चला। जब पूरी तरह सुनिश्चित हो गया कि मलबे में कोई नहीं है, इस अभियान को बंद कर दिया गया।
रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि बचाव अभियान को अब रोक दिया गया है और सड़क को यातायात के लिए खोल दिया गया है। बचाव अभियान की निगरानी बीआरओ के मुख्य अभियंता परियोजना स्वास्तिक ने अपने अधिकारियों और टीम के साथ की। इससे पहले सिक्किम के नाथुला में बुधवार सुबह फिर से सेना ने हिमस्खलन वाली जगह पर बचाव अभियान शुरू किया था। ताकि अगर कोई पर्यटक फंसा है, तो उसे निकाला जा सके। इस बीच, सात मृतकों की जानकारी मिली है, जिसमें छह वर्षीय बच्चे समेत सात लोगों की मंगलवार को हिमस्खलन में मौत हो गई थी, साथ ही तेरह अन्य घायल हैं। सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने एसटीएमएन अस्पताल में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात की। घायलों में सात को छुट्टी दे दी गई है जबकि छह का अभी भी उपचार चल रहा है।
गंगटोक के एसटीएमएन में मंगलवार को आए हिमस्खलन में जिन सात पर्यटकों की मौत हुई है, उनमें एक छह वर्षीय नाबालिग भी है। मृतकों में शिव लामिछाने, आशिका ढकाल और मुन्ना शाह श्रेष्ठा (नेपाल), बाल सिंह और रिव्या सिंह (उत्तर प्रदेश), सौरव राय चौधरी और प्रीतम माईती (पश्चिम बंगाल) शामिल हैं
सात घायलों को अस्पताल में शुरुआती इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। उनमें दिल्ली के पर्व गोयल और नेहल गोयल, लखनऊ यूपी के नीरज शर्मा, कोलकाता के पुतुल सिंह, राकेश सिंह, सुमित दास और तथागत राय चौधरी शामिल हैं। अभी छह नेपाल की गीता सापकोटा, ज्योति गुरुंग और रमेश खनाल, सिलिगुड़ी के पपल सरकार और रंजीत दास और कोलकाता के सुभ्राज्योति का इलाज चल रहा है। सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने एसटीएमएन अस्पताल में जाकर घायलों से मुलाकात की और अधिकारियों को हर संभव मदद करने को कहा।
इस बीच, बुधवार को एक बार फिर सेना ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। मंगलवार सुबह करीब 11.10 बजे, गंगटोक को नाथुला से जोड़ने वाले जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर भारी हिमस्खलन हुआ। नाथुला के रास्ते में 20-30 पर्यटकों के साथ लगभग 5-6 वाहनों के बर्फ के नीचे दबने की आशंका व्यक्त की गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही त्रिशक्ति कोर, भारतीय सेना और बीआरओ परियोजना की स्वास्तिक की टीम तुरंत राहत व बचाव कार्य शुरू किया।