पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की अंतरिम सुरक्षा 17 जुलाई तक बढ़ा दी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई तय की है, जबकि सीआईडी इस मामले की जांच जारी रखेगी। पढ़िए रिपोर्ट-
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी को जबरन कार्रवाई से दी गई अंतरिम सुरक्षा को 17 जुलाई तक बढ़ा दिया है। यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े हस्ताक्षर फर्जीवाड़े से जुड़ा है। जस्टिस शुभ्रा घोष ने अंतरिम सुरक्षा बढ़ाई, क्योंकि जिन जज की कोर्ट में यह मामला जाना था, वह अभी जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच में हैं।
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जस्टिस शुभ्रा घोष ने क्या निर्देश दिया?
अभिषेक बनर्जी के वकील के मामले का जिक्र करने के बाद जस्टिस घोष ने आदेश 17 जुलाई तक बढ़ा दिया, क्योंकि जस्टिस कौशिक चंदा की ओर से दी गई अंतरिम सुरक्षा आज खत्म हो रही थी। जस्टिस घोष ने निर्देश दिया कि मामला 13 जुलाई को नियमित बेंच के सामने फिर से सुनवाई के लिए रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि समन्वय पीठ की ओर से दी गई अंतरिम सुरक्षा की शर्तें अगली आदेश तक जारी रहेंगी।
सीआईडी ने की थी अभिषेक बनर्जी से पूछताछ
जस्टिस चंदा के निर्देश पर अभिषेक बनर्जी 11 जून को मामले में पूछताछ के लिए सीआईडी के मुख्यालय भवानी भवन में पेश हुए। जस्टिस चंदा ने उस समय तीन हफ्ते की अंतरिम सुरक्षा देते हुए कहा था कि डायमंड हार्बर के सांसद को जांच एजेंसी के समक्ष जरूरत पड़ने पर 24 घंटे पहले सूचना देकर हाजिर होना होगा।
टीएमसी के बागी विधायकों ने की थी शिकायत
सीआईडी विधानसभा सचिवालय में टीएमसी के बागी विधायकों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत की जांच कर रही है। आरोप है कि उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए। इन हस्ताक्षरों का इस्तेमाल पार्टी के उस प्रस्ताव में किया गया था, जिसमें बालीगंज विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था।
विधानसभा सचिवालय ने इस शिकायत पर कोलकाता पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसे बाद में राज्य के गृह सचिव ने जांच के लिए सीआईडी को सौंप दिया। डायमंड हार्बर के सांसद को पहले भी सीआईडी ने तीन बार समन भेजा था। लेकिन वह कई कारणों का हवाला देकर जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए थे।