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मुख्यमंत्री विवाद पर बोले नाईक, विधायक चुनेंगे गोवा का सीएम

Thu, 26 Jan 2017 05:36 PM IST
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
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श्रीपाद नाईक
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पणजी। मौसम की तरह गोवा का राजनीतिक माहौल भी उत्तर भारत से जुदा है। उत्तर भारत का मौसम बेशक सर्द है, मगर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है लेकिन गोवा में मौसम गर्म होने के बावजूद भी चुनावी राजनीति नरम पड़ी हुई है। हालांकि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को दोबारा से सूबे का मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाओं ने जरूर यहां के रानीतिक माहौल में थोड़ी हलचल पैदा की है।  
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयान के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने गोवा के मुख्यमंत्री पद के लिए अपने अवसर खोले रखे हैं। मगर पार्टी एवं मोदी सरकार के एक अन्य मंत्री श्रीपाद यशो नाईक का कहना है कि गोवा के अगले मुख्यमंत्री का चयन चुनाव में जीतकर आने वाले विधायक करेंगे।

अमर उजाला से बातचीत में नाईक ने कहा कि चुनाव में जीत कर आने वाले विधायक और पार्टी तय करेगी कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। उन्होंने कहा कि गोवा का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसको लेकर कोई खींचातानी नहीं है। वर्तमान मुख्यमंत्री लक्ष्मी कांत पार्सेकर भी बेहततर काम कर रहे हैं। शाह और गडकरी के बयान को लेकर सवाल पूछे जाने पर श्रीपाद नाईक ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री के लिए किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया है। इस चर्चा को हवा देना मुझे जरूरी नहीं लगता। यहां के मुख्यमंत्री की मदद पर्रिकर पहले भी करते रहे हैं आगे भी करते रहेंगे। 
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गोवा चुनाव के अन्य पहलूओं पर बेबाक बात करते हुए केंद्रीय आयूष राज्य मंत्री श्रीपद नाईक ने कहा कि महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी को हमसे अलग नहीं होना चाहिए था। प्रदेश में जनता के मिल रहे समर्थन को देखकर लगता है कि पिछले चुनाव से ज्यादा सीटों के साथ पार्टी दोबारा से सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को लेकर न कोई संकट है और न हीं कोई खिंचतान। पार्टी में कई योग्य चेहरे हैं। 
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इस बार नए तरीके से गोवा में हो रहा प्रचार

श्रीपाद नाईक
वेलिंगकर को मनाने का किया पूरा प्रयास
संघ से अलग हटकर नया राजनीतिक धड़ा बनाकर भाजपा की मुसीबत बढ़ाने वाले सुभाष वेलिंगकर के सवाल पर नाईक ने कहा कि उन्हें मनाने का पूरा प्रयास हुआ था। तात्कालिक स्थिति के मदृदेनजर जो भी हो सकता था पार्टी की सरकार ने किया। लेकिन चुनाव परिणामों पर उनकी बगावत का असर नहीं होगा। वेलिंगकर, एमजीपी और शिवसेना कुछ सीटों पर ही प्रभाव डालेंगी। वे महज वोट कटूआ साबित होंगे। दरअसल वेलिंगर ने भाजपा से यह कहते हुए दूरी बरती थी कि पार्टी ने स्थानिय भाषा को प्राईमरी स्कूलों में तरजीह देने के वादे से मुकर गई है। एकजमाने में वेलिंगकर राज्य भाजपा के दोनों वरिष्ठ चेहरों पार्रिकर और श्रीपाद के राजनीतिक गुरू रहे हैं।

पारंपरिक चुनाव प्रचार नदारद
वैसे यहां का चुनाव प्रचार का तरीका भी उत्तर भारत से भिन्न है। उत्तर भारत के पारंपरिक चुनाव प्रचार के तरीकों होर्डिंग, बैनर, पोस्टर, लाउडस्पीकर से लैस होकर घुमने प्रचार वाहन सरीखे प्रचार के माध्यम यहां नजर नहीं आ रहे हैं। प्रत्याशियों का जोर डोर टू डोर प्रचार पर ज्यादा है। नेताओं की चुनावी सभा भी देापहर के बाद ही रंग पकडती दिख रही है। 
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