श्रीकृष्ण गोशाला कमेटी की संरक्षक रेणुका शर्मा भी इस कमेटी की एक सदस्य हैं। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि अलका लाहोटी इस संस्था के अध्यक्ष के रूप में पिछले तीन साल से काम कर रही थीं। इस दौरान उनके विरुद्ध कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने गोशाला की एक भूमि से मिट्टी हटाने का सौदा बिना कमेटी की अनुमति के कर दिया था। रेणुका शर्मा का आरोप है कि इस मिट्टी बिक्री से उन्होंने लगभग एक करोड़ रूपये अपने नाम हड़प कर लिए हैं।
रेणुका शर्मा के मुताबिक जब अलका लाहोटी को कमेटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब इस गोशाला में 153 से अधिक गायें, बैल और कई अन्य गोवंश थे। इनमें से ज्यादातर गोवंश गौ तस्करों से बरामद किए गए थे। लेकिन अब मौके पर पाया गया है कि संस्था में केवल 92 गौवंश ही बचे हैं। बाकी गौवंश के गायब होने को लेकर अलका लाहोटी पर कई गंभीर आरोप हैं जिनकी जांच की जा रही है।
रेणुका शर्मा ने बताया कि अलका लाहोटी ने कमेटी के संविधान के अनुसार प्रत्येक जन्माष्टमी पर कमेटी की वार्षिक बैठक बुलाकर गौशाला की सालाना आय-व्यय रिपोर्ट पेश नहीं की। उन्होंने सभी सदस्यों के पास पत्र भेजकर उनके हस्ताक्षर लिए, जबकि संविधान के अनुसार इसकी बैठक बुलाना अनिवार्य था। इन्हीं कारणों से उन पर कार्रवाई की गई। अलका लाहोटी ने पिछले साल के अक्टूबर महीने में संरक्षक रेणुका शर्मा पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।
ये तथ्य भी सामने आए
दरअसल, इस विवाद की परतें धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही हैं। कथित तौर पर अलका लाहोटी सबको यही बताती थीं कि यह श्रीकृष्ण गोशाला उनके पिता वीरेंद्र कुमार लाहोटी ने खुलवाया था। लेकिन अब सामने आया है कि 1953-54 में इस गोशाला के लिए स्थानीय लोगों ने भूदान किया था। अलका लाहोटी के पिता वीरेंद्र कुमार लाहोटी एक अग्रणी वकील और वरिष्ठ समाज सेवी थे। उन्होंने इस गोशाला के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन उन्होंने गोशाला के लिए पूरी भूमि दान नहीं की थी।
इस गोशाला के नाम पर बिजनौर के लोगों के द्वारा 450 बीघे की भूमि दान की गई थी। 280 बीघे भूमि गोशाला से लगभग 10 किलोमीटर दूर मिट्ठूपुर गांव में है। शेष 170 बीघे पर गोशाला बनी हुई है। इसी हिस्से में एक कृष्ण गोपाल महाविद्यालय बना दिया गया है, जिसकी भूमि को वापस पाने के लिए पूरा विवाद खड़ा हुआ।
दरअसल, इस श्रीकृष्ण गोशाला के अध्यक्ष समय-समय पर कमेटी के सदस्यों के चुनाव के आधार पर बदलते रहते हैं। इसी क्रम में एक बार संतोष कुमार अग्रवाल को श्रीकृष्ण कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। आरोप है कि उन्होंने अध्यक्ष रहते हुए गोशाला की 70 बीघा जमीन कृष्ण गोपाल महाविद्यालय के लिए दे दी और स्वयं को ही इस महाविद्यालय का संरक्षक बना दिया। यानी एक तरह से उन्होंने यह भूमि कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर स्वयं अपने आप को ही दे दिया। इसी हिस्से को वापस पाने के लिए अलका लाहोटी लड़ाई लड़ रही थीं।
चंपत राय या उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं
अमर उजाला को श्रीकृष्ण गोशाला कमेटी के गठन के समय प्रबंध कमेटी के सदस्यों की पूरी सूची मिल गई। इस कमेटी के किसी भी सदस्य के रूप में चंपत राय या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम नहीं है। इसी प्रकार, वर्तमान समय में बनी कमेटी में भी चंपत राय या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम शामिल नहीं है।
जहां तक चंपत राय के द्वारा कृष्ण गोपाल महाविद्यालय की मान्यता के लिए पत्र लिखे जाने का मामला है, बताया गया है कि चंपत राय ने यह पत्र एक सामाजिक कार्य समझकर लिख दिया था। उन्हें केवल इतनी सूचना दी गई थी कि चूंकि नगीना में कोई महाविद्यालय नहीं है और छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में भारी परेशानी होती है, अगर यह महाविद्यालय नगीना में बन जाता है तो इससे स्थानीय छात्रों को काफी लाभ होगा। लेकिन बाद में विवादित भूमि का मामला सामने आ गया था।
इस गोशाला की भूमि के अंदर ही ब्राह्मणी का तालाब और एक काली मां का प्राचीन मंदिर है। इसे बहुत पुराना बताया जाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि ब्राह्मणी के तालाब में नहाने से कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। स्थानीय लोग इस तालाब और मंदिर को बहुत पवित्र मानते हैं।
अमर उजाला ने इस पूरे प्रकरण पर अलका लाहोटी का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे उपलब्ध नहीं थीं।