संसद में उच्च सदन में शुक्रवार को अनोखी स्थिति पैदा हो गई। आम तौर पर आसन वक्ताओं को समय का ध्यान दिलाते हुए संक्षिप्त में बोलने का निर्देश देता है। इसके उलट आसन ने पहली बार वक्ताओं को कभी पहले भाषण के नाम पर तो कभी और भी कुछ कहना चाहें तो कहें के नाम पर तय समय से अधिक अपनी बात रखने का मौका दिया। यह स्थिति इसलिए आई कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष के वॉकआउट के कारण उच्च सदन में वक्ताओं का टोटा पड़ गया।
दरअसल नीट पेपर लीक मामले में विपक्षी इंडिया ब्लॉक में शामिल सभी दलों ने शुक्रवार की कार्यवाही का बहिष्कार किया। चूंकि कार्यवाही एजेंडे में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा सूचीबद्ध था। ऐसे में पूर्वाह्न 11 बजे से शाम छह बजे तक कार्यवाही संचालन की जिम्मेदारी सत्तारूढ़ राजग गठबंधन पर आ गई।
देवड़ा को और बोलने को कहा
ऐसी ही बानगी तब नजर आई जब धन्यवाद प्रस्ताव पर मिलिंद देवड़ा ने अपनी बात रखी। देवड़ा 22 मिनट बोलने के बाद भाषण खत्म करना चाहते थे। हालांकि सभापति धनखड़ ने उन्हें यह कह कर और बोलने के लिए प्रेरित किया कि आपका तो इस सदन में यह मेडेन स्पीच (पहला भाषण) है।
और कुछ कहना चाहें तो कहें
समय बढ़ाने की नौबत तब आई जब भाजपा के डॉ अनिल सुखदेव राव बोंडे ने निर्धारित समय से अधिक बोलने के बाद अपनी बात खत्म करनी चाही। उन्होंने कहा कि अब वह अपने भाषण को विराम देना चाहते हैं। इस पर सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे घनश्याम तिवारी ने उनसे कहा कि अपनी बात पूरी करें। आप और भी कुछ कहना चाहते हैं तो कहें।
विपक्ष के वॉकआउट से बदली परिस्थिति
शुक्रवार को धन्यवाद प्रस्ताव के लिए सात घंटे का समय निर्धारित था। इसमें आधा समय विपक्ष के वक्ताओं के लिए था। वॉकआउट के बाद विपक्ष के भाषणों के लिए तय समय के उपयोग की जिम्मेदारी भी सत्तापक्ष पर आ गई। विपक्ष के वॉकआउट के कारण सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध वक्ताओं के पास कहने के लिए कोई बात नहीं बची। दरअसल ये वक्ता पूर्व निर्धारित समय के अनुरूप भाषण की तैयारी के साथ सदन में आए थे।