मालेगांव ब्लास्ट के आरोपियों के बरी किए जाने पर असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाए हैं।उन्होंने कटाक्ष किया, 'मुझे लगता है हम सब जानते हैं इसका जवाब क्या होगा। यही है 'आतंक पर सख्त' मोदी सरकार। दुनिया याद रखेगी कि इस सरकार ने एक आतंकवाद के आरोपी को संसद भेजा।'
एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को मालेगांव ब्लास्ट केस में सभी आरोपियों को बरी किए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि यह एक 'जानबूझकर कमजोर जांच' का नतीजा है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस धमाके में छह नमाजी मारे गए थे और करीब 100 लोग घायल हुए थे, जिनका अपराध सिर्फ यह था कि वे मुस्लिम थे।
'क्या मोदी और फडणवीस सरकार करेंगी फैसले के खिलाफ अपील?'
उन्होंने लिखा, '17 साल बाद अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। क्या मोदी और फडणवीस सरकारें इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगी, जैसे उन्होंने मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों के बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ तुरंत स्टे की मांग की थी?' ओवैसी ने महाराष्ट्र की तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों से भी सवाल पूछा कि क्या वे इस मामले में न्याय और जवाबदेही की मांग करेंगी।
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एनआईए पर भी लगाया गंभीर आरोप
असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि 2016 में इस केस की तत्कालीन सरकारी वकील रोहिणी सालियन ने कहा था कि एनआईए ने उनसे कहा था कि वे आरोपियों के खिलाफ नरमी बरतें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2017 में एनआईए ने भाजपा सांसद और आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बरी करवाने की कोशिश की थी।ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा, 'यह वही शख्स हैं जो 2019 में बीजेपी सांसद बनीं।'
हेमंत करकरे का भी किया जिक्र
ओवैसी ने पूर्व पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने इस ब्लास्ट की साजिश का खुलासा किया था, लेकिन दुर्भाग्यवश 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों में पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा मार दिए गए। ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या एनआईए और एटीएस (एंटी टेररिज्म स्क्वाड) की गलत जांच के लिए किसी को जवाबदेह ठहराया जाएगा?
कोर्ट का फैसला
बता दें कि महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में 2008 में हुए बम धमाके में छह लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। करीब 17 साल बाद मुंबई की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया, जिनमें प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि 'इनके खिलाफ कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं मिले।'