दुनिया के 147 देशों के आंकड़ों ने किशोर लड़कों के साथ यौन हिंसा की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट में 14 से 17 साल के लड़कों को सबसे ज्यादा जोखिम में पाया गया, भारत के आंकड़े भी शामिल हैं। आखिर एम्स ने इस मामले की अलग तरह से जांच की जरूरत क्यों बताई? पढ़िए रिपोर्ट
यौन हिंसा को अक्सर लड़कियों और महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन नई वैश्विक रिपोर्ट ने किशोरों को लेकर भी गंभीर तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 18 साल की उम्र से पहले हर 100 किशोरों में करीब 17 ने किसी न किसी तरह की यौन हिंसा झेली। इसमें जबरन छूना, यौन हमला और बिना छुए की जाने वाली यौन हरकतें भी शामिल हैं।
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शोधकर्ताओं ने भारत समेत 147 देशों की 1,412 शोध रिपोर्टों का विश्लेषण किया। करीब 29 लाख पुरुषों के आंकड़े शामिल थे। एक साल के अंदर दुनिया में करीब 6.09 करोड़ लड़के यौन हिंसा के शिकार हुए। इनमें करीब 3.48 करोड़ लड़कों के साथ दुष्कर्म या यौन हमला होने का अनुमान है। मंगलुरु में किशोर लड़कों पर हुई एक शोध में करीब 18 फीसदी ने यौन उत्पीड़न का अनुभव बताया।
14 से 17 साल के ज्यादा पीड़ित
रिपोर्ट के मुताबिक, 14 से 17 साल के लड़कों में यौन हिंसा की दर सबसे ज्यादा रही। इस आयु वर्ग में पिछले एक साल में किसी भी तरह की यौन हिंसा की अनुमानित दर 10.7 फीसदी थी। 10 से 13 साल के लड़कों में यह 7.5% रही। 9 साल तक के बच्चों में संपर्क वाली यौन हिंसा की दर 1.4 फीसदी थी।
अध्ययन के अनुसार, परिचित लोग, परिवार और रिश्तेदारी के दायरे से जुड़े यौन शोषण के आरोपी भी मिले। हालांकि, अजनबी आरोपी अपेक्षाकृत ज्यादा सामने आए। खासतौर पर विशेष परिस्थितियों में रह रहे लड़कों में अजनबी सबसे आम आरोपी थे।