रणदीप सुरजेवाला और कपिल सिब्बल
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अयोध्या में राम जन्मभूमि न्यास द्वारा भूमि खरीद में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस और शिवसेना ने सवाल खड़े करते हुए न्यास और अन्य नेताओं से स्पीष्टीकरण मांगा है। कांग्रेस ने तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है, वहीं शिवसेना से सरकार से जवाब देने को कहा है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि ‘‘भगवान राम और राम मंदिर की लड़ाई हमारे लिए आस्था का विषय है। कुछ लोगों के लिए यह मामला राजनीतिक है। मंदिर निर्माण के लिए जो न्यास गठित किया गया उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि ये आरोप सही हैं या गलत। मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए थे। उन्हें भी इस बारे में जवाब देना चाहिए। राम मंदिर आस्था का विषय है।
राउत ने कहा कि लोगों ने आस्था के चलते ही इसके लिए दान दिया। यहां तक कि शिवसेना ने भी न्यास को एक करोड़ रुपये का दान दिया।’’ राउत ने कहा कि मंदिर निर्माण का मामला उनकी पार्टी और जनता के लिए आस्था का विषय है। उन्होंने कहा कि सुबह आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने उनसे बात की है और उन्होंने जो ‘‘साक्ष्य दिए हैं, वे स्तब्ध करने वाले हैं।’’
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प्रधानमंत्री इस घोटाले पर दें जवाब- कांग्रेस
कांग्रेस ने राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर जमीन खरीदी में लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सोमवार कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस घोटाले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाब देना चाहिए एवं उच्चतम न्यायालय की निगरानी में इसकी जांच होनी चाहिए।
पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भगवा राम आस्था के प्रतीक हैं, लेकिन भगवान राम की अलौकिक अयोध्या नगरी में राम मंदिर निर्माण हेतु करोड़ों लोगों से एकत्रित चंदे का दुरुपयोग और धोखाधड़ी महापाप और घोर अधर्म है, जिसमें भाजपाई नेता शामिल हैं। उच्चतम न्यायालय यह से आग्रह भी किया कि वह मंदिर निर्माण के चंदे के रूप में प्राप्त राशि व खर्च का न्यायालय के तत्वाधान में ऑडिट करवाए तथा चंदे से खरीदी गई सारी जमीन की कीमत को लेकर भी जांच करे।
करोड़ों रुपये का घोटाला
सुरजेवाला ने दावा किया, ‘‘जमीन की रजिस्ट्री के दोनों कागजों पर श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा गवाह के तौर पर मौजूद हैं। दोनों कागजों पर दूसरे गवाह भाजपा के प्रमुख नेता और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय हैं। इसका मतलब साफ है कि 2 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन पांच मिनट में 18.5 करोड़ रुपये में खरीदने के निर्णय की राममंदिर निर्माण ट्रस्ट के न्यासियों को पूरी जानकारी थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘श्री राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार 5 फरवरी, 2020 को हुआ। उपरोक्त तथ्यों से साफ है कि करोड़ों लोगों द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए दी गई दान राशि में घोर महापाप, अधर्म व घोटाला हुआ है, लेकिन प्रधानमंत्री पूरी तरह से चुप हैं।’’