शुक्रवार को निर्वाचन आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी थी। अब यह मामला राष्ट्रपति के पास है जो इस मामले पर आखिरी फैसला लेंगे। विधायकों की सदस्यता रद्द होने का सीधा असर बेशक दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर ना पड़े लेकिन इससे पार्टी की बुनियाद कमजोर जरूर हो सकती है।
आप के इस संकट में उनके साथ विपक्ष के कई नेता खड़े नजर आ रहे हैं। जिन्होंने पार्टी के समर्थन में अपने बयान दिए हैं। शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने विधायकों की सदस्यता रद्द होने पर कहा- निर्वाचन आयोग (ईसी) के निर्णय पर एक प्रश्नचिह्न लगा हुआ है। जब इस तरह के मामले आते हैं तब ईसी पर सवाल उठता है। इसके लिए वह (ईसी) खुद जिम्मेदार है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री
ममता बनर्जी का कहना है कि संवैधानिक संस्था का प्रयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं होना चाहिए। ट्विटर पर बनर्जी ने कहा- राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किसी संवैधानिक संस्था का प्रयोग नहीं होना चाहिए। 20 आप विधायकों को माननीय निर्वाचन आयोग द्वारा सुनवाई का मौका नहीं मिला। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह नैचुरल जस्टिस के सिद्धांतों के खिलाफ है। इस कठिन समय में हम अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम के साथ हैं।