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कक्का शिव ने बढाई मध्यप्रदेश के मामा की मुश्किलें

Wed, 07 Jun 2017 07:05 PM IST
amarujala.com- Written By: संजय मिश्र
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PM Modi's 56 inch chest is now 100 inch, Says Shivraj Singh Chauhan - फोटो : demo
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कक्का शिव की वजह से मध्यप्रदेश में मामा के नाम से पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की राजनैतिक मुश्किलें बढी हुई हैं। हालांकि कक्का जी, शिवराज के अपने कोई रिश्तेदार नहीं हैं। बावजूद उसके कक्का की वजह से मध्यप्रदेश का सियासी पारा बढा हुआ है। अपने उपज की वाजिब मांग को लेकर किसान सडक पर हैं। तो विपक्ष ने सरकार की नींद हराम कर रखी है। जबकि कृषि क्षेत्र में बेहत्तर कार्य के लिए सूबे को लगातार राष्ट्रीय स्तर का कृषि कर्मण अवार्ड मिलता आ रहा है। अब शिवराज की मुश्किलें चूकी कक्का की वजह से है। इसलिए वे भी बैकफूट पर रहने को मजबूर हैं।
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कौन हैं शिवराज के लिए संकट बने कक्का जी
कक्का जी उर्फ शिवकुमार शर्मा, शिवराज के कोई रिश्तेदार नहीं बल्कि मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के प्रमुख नेता हैं। शर्मा के नेतृत्व में उत्पाद का वाजिब मूल्य और कर्ज माफी की मांग को लेकर किसानों ने मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ सूबे की राजधानी भोपाल से लेकर अन्य शहरों में जोरदार आंदोलन छेड रखा है। किसान आंदोलन को प्रगतिशिल बताते हुए कक्का जी ने मध्य प्रदेश सरकार पर दोहरा रूख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि एक ओर प्रदेश सरकार 20 उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने की तैयारी कर रही है। तो दूसरी ओर किसानों की सूध लेने के लिए उसके पास वक्त नहीं है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के बैनर तले किसानों ने महाबंद का एलान किया हुआ है। जिसके तहत आगामी 9 अगस्त को देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों को जाम करने का एलान किया गया है।

शिवराज सिंह चौहान
संघ से अलग हटकर कक्का ने बनाया अपना राष्ट्रीय संगठन
2004 में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में भूमिका निभाने वाले शिव कुमार शर्मा कक्का जी पहले संघ के संगठन भारतीय किसान संघ में कार्यरत थे। शिवराज को सूबे का ताज मिलने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री के शुभचिंतकों के रूप में गिना जाता था। मगर किसानों के हित के लिए कक्का जी न सिर्फ शिवराज से दूर हुए हैं बल्कि संघ से भी अलग हैं। संघ से अलग कक्का जी ने किसानों के बीच राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ नाम से अपना एक मजबूत संगठन बना लिया है। अब उसी संगठन के बैनर तले वे किसानों को एकजूट कर शिवराज की मुश्किलें बढा रहे हैं। 

भारतीय किसान संघ से कैसे अलग हुए कक्का 
किसान हित को लेकर संघ के संगठन भारतीय किसान संघ में कार्य करने वाले कक्का जी वर्ष 2010 में मध्य प्रदेश प्रांत के अध्यक्ष थे। उनकी अगुवाई में किसान हित को लेकर भारतीय किसान संघ ने अपने ही मुख्यमंत्री के खिलाफ आंदोलन छेड दिया था। करीब 2500 ट्रैकटर और तमाम वाहनों के जरिए पहुंचे 50 हजार से ज्यादा किसानों ने 20 दिसंबर 2010 को भोपाल शहर का घेराव कर हुक्का पानी बंद कर दिया था। इसके बाद से ही कक्का की राह संघ और शिवराज से जुदा होने लगी। अमर उजाला से बातचीत में कक्का ने बताया कि 2010 के आंदोलन के बाद वर्ष 2011 में संघ के सभी 40 संगठनों की समन्वय बैठक हुई।

उसमें स्वयं सरसंघचालक मोहन राव भागवत उपस्थित थे। सभी संगठनों से उनकी बीते दिनों की कार्यक्रमों की जानकारी ली गई। इस क्रम में किसान संगठन ने भी अपने कार्यक्रमों की जानकारी उन्हें प्रदान कि इसपर संघ प्रमुख की टिप्पणी चौंकाने वाली थी। उन्होंने कहा कि संघ के संगठन आंदोलन करने के मकसद से नहीं बने हैं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों से नए प्रचारक बनाने के लिए हैं। कक्का के अनुसार उनको संघ प्रमुख की यह बात नागवार गुजरी। चूकी उनमें किसान हित का जज्बा भरा हुआ था। इसलिए उन्होंने संघ के भारतीय किसान संघ से अलग हटकर अपनी नई पारी शुरू की है।
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पीएम मोदी से भी है नाराजगी

पीएम मोदी के 3 सुपरहिट डायलॉग्स - फोटो : SELF
किसानों के लिए जेल भी रह चुके हैं कक्का जी 
रायसेन के बरेली में बारदाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के खिलाफ प्रशासन की ओर से चली गोली के मामले का विरोध करने के मामले में कक्का जेल भी काट चूके हैं। अपने समर्थकों के साथ जेल में 1 साल का सफर पूरा कर कक्का ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ का गठन किया। एक वर्ष के अल्प समय में उनका संगठन मध्य प्रदेश के किसानों के बीच गहरी पैठ बना चूका है। 

पीएम मोदी से भी है कक्का को नाराजगी
कक्का का कहना है कि किसानों का दु:ख दूर करने के मामले में मोदी की सरकार भी पूर्व की अन्य सरकारों सरीखे है। उनका कहना है कि बीते 3 वर्ष में मोदी सरकार ने 22 ऐसे कदम उठाए हैं जोकि सीधे—सीधे किसान विरोधी हैं। मध्य प्रदेश के कृषि विकास की कलई खोलते हुए कक्का ने कहा कि वर्ष 2004 में भाजपा की सरकार बनने से पहले मध्य प्रदेश में किसानों का कर्ज महज 2000 करोड रूपया था। वर्तमान में बढकर यह 44 हजार करोड के पार पहुंच गई है। किसान आत्म हत्या के मामले भी मध्य प्रदेश में बढे हैं। 2004 में मध्य प्रदेश में रोजाना मरने वाले किसानों की संख्या जहां महज 1 थी। तो आज वह बढकर प्रतिदिन 6 हो गई है। कर्ज के मामले में भी मध्य प्रदेश का यही आलम है। कक्का के अनुसार 2004 में मध्य प्रदेश पर 22 हजार करोड का कर्ज था जोकि बढकर अब 1 लाख 65 हजार करोड हो गया है। 
 
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