मुख्यमंत्री शिंदे ने किया पलटवार
वहीं, मुख्यमंत्री शिंदे ने पलटवार करते हुए कहा कि डकैतों को डकैती के बारे में बात करना शोभा नहीं देता और दावा किया कि वे (शिवसेना-यूबीटी) एसआईटी की वजह से डरे हुए हैं और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। शिंदे ने सोमवार को मुंबई नगर निकाय के विभिन्न कार्यों में 12,024 करोड़ रुपये की अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन को मंजूरी दे दी।
'भाजपा-शिवसेना से कोई सवाल करने वाला नहीं'
बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) में भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे ठाकरे ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की गैर-मौजूदगी में उनसे (भाजपा-शिवसेना सरकार पर) सवाल करने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में चुनाव का सामना करने का साहस नहीं है।
उद्धव ने भ्रष्टाचार के आरोपों को किया खारिज
ठाकरे ने बीएमसी में भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किया और कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू होने के बावजूद सभी ठेके निविदा प्रक्रिया के माध्यम से दिए गए थे। भारत के सबसे अमीर नगर निकाय बीएमसी का नेतृत्व 1997 से 2022 तक शिवसेना (अविभाजित) कर रही थी।
सावधि जमा बढ़कर हुई 92 हजार करोड़ रुपये: उद्धव ठाकरे
ठाकरे ने कहा कि जब शिवसेना ने 1997 में सत्ता संभाली थी तब बीएमसी का राजस्व घाटे में था लेकिन अगले 25 साल में उसकी सावधि जमा (एफडी) बढ़कर 92,000 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन एफडी से करीब 7,000-9,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं जो मुंबई के खजाने को खाली करने और दिल्ली के सामने भीख मांगने की चाल है।
अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा निकालेगी शिवसेना (यूबीटी)
उन्होंने कहा, मुंबई बिना किसी संरक्षक के रह गई है और लूट जारी है। किसी को बीएमसी पर सवाल उठाना होगा क्योंकि यह लोगों का पैसा है। शिवसेना (यूबीटी) बीएमसी में अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा निकालेगी।' उन्होंने कहा कि उनके बेटे आदित्य समेत शिवसेना के नेता मोर्चा का नेतृत्व करेंगे। बीएमसी वर्तमान में एक प्रशासक के अधीन है और इसके पार्षदों का कार्यकाल पिछले साल की शुरुआत में समाप्त हो गया था।