महाराष्ट्र के नागपुर में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के विधायक नितिन देशमुख और समर्थकों के पुलिस अधिकारियों के साथ धक्का मुक्की करने का मामला सामने आया है। बताया गया है कि नितिन देशमुख पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ रवि भवन में घुसने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद विधायक और उनके समर्थकों ने पुलिस के साथ धक्का मुक्की शुरू कर दी।
नितिन देशमुख अकोला जिले के बालापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नागपुर पुलिस ने इस मामले में विधायक नितिन देशमुख और उनके समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक मंगलवार शाम करीब छह बजे विधायक नितिन देशमुख अपने कुछ साथियों के साथ कार से रवि भवन पहुंचे और भवन में घुसने लगे। लेकिन पुलिसकर्मियों ने विधायक को रोक दिया। उनके समर्थकों को चेकिंग के लिए रोका गया। इसके बाद देशमुख के समर्थकों ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की।
बीएमसी कार्यालय में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच झड़प
वहीं, बुधवार को दक्षिण मुंबई में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) मुख्यालय में स्थित पार्टी दफ्तर में शिवसेना के दोनों गुट आमने-सामने आ गए। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट के समर्थकों के बीच झड़प हो गई। पुलिस के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ, लेकिन परिसर में एक घंटे तक तनाव बना रहा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर मध्य मुंबई के सांसद राहुल शेवाले, स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष यशवंत जाधव और शिवसेना शिंदे गुट से जुड़े पूर्व पार्षद शीतल म्हात्रे शाम करीब पांच बजे पार्टी कार्यालय पहुंचे। सूत्रों ने कहा कि शिवसेना उद्धव गुट के आशीष चेंबूरकर और सचिन पडवाल सहित पूर्व पार्षदों ने उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई। इसके बाद तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। करीब एक घंटे तक तनाव बना रहा और दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी को कार्यालय से हटाया।
इस घटना पर महाराष्ट्र के मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि उन्हें लगता है कि शांति बहाल होनी चाहिए और उद्धव ठाकरे गुट को यह स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने बहुमत खो दिया है। ग्राम पंचायत चुनाव में भी वे पांचवें स्थान पर थे।