मुंबई में नीट परीक्षा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने विजय मार्च निकाला। इस रैली के दौरान राज ठाकरे ने कहा कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की सफलता ने साबित कर दिया है कि 'जेन-जी' सरकार को चुनौती दे सकती है; इस रैली में उनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे भी मौजूद थे। मुंबई में उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे की रैली में उन नीट परीक्षार्थियों को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी।
यह भी पढ़ें-
Rahul Gandhi: 'छात्रों को मारने का आदेश किसने दिया?' राहुल गांधी ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी में उठाए बड़े सवाल
इस दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए छात्र आंदोलन की सराहना करते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि 'वोट चुराए जा सकते हैं, लेकिन लोगों को नहीं'। शिवाजी पार्क में आयोजित 'तिरंगा रैली' को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि छात्रों ने एकजुट होकर लोकतंत्र के इतिहास में सुनहरा अध्याय लिखा है। उन्होंने कहा कि यह किसी चुनाव की जीत नहीं, बल्कि 'देशभक्तों की अंधभक्तों पर जीत' है और यह भाजपा के खिलाफ एक बड़े संघर्ष की शुरुआत है।
इस रैली में बड़ी संख्या में कॉलेज छात्र-छात्राएं तिरंगा लेकर पहुंचे। कई छात्र संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरों वाले पोस्टर लेकर भी शामिल हुए। यह रैली केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आयोजित की गई। उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया कि धर्मेंद्र प्रधान को पहले क्यों नहीं हटाया गया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया, उनका दर्द किसी भी मंत्री को हटाने से बड़ा है और उसे कभी नहीं भुलाया जा सकता। उन्होंने युवाओं से आंदोलन की भावना को बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सत्ता के अहंकार को बर्दाश्त न करें और देश को कमजोर नहीं होने दें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के मंत्री जनता के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक दलों को तोड़ने में लगे हैं।
उद्धव ठाकरे ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी तंज कसते हुए कहा कि वह महंगाई और रुपये की गिरती कीमत पर बात नहीं करतीं, बल्कि पेपर लीक के फायदे गिनाती हैं। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पर भी उन्होंने निशाना साधा। वहीं, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने कहा कि जनता की ताकत के सामने सत्ता और अहंकार को झुकना पड़ता है। उन्होंने युवाओं से आगे भी लोकतांत्रिक मुद्दों पर आवाज उठाने की अपील की।
'युवाओं ने एक तानाशाह और तानाशाही को हिलाकर रख दिया'
इस दौरान शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने कहा, 'युवाओं ने एक तानाशाह और तानाशाही को हिलाकर रख दिया है। यह युवाओं की ताकत है, यह नया भारत है। 'मंत्री प्रधान' से 'प्रधान मंत्री' बनने का सफर अब बहुत छोटा रह गया है। लोग नितिन गडकरी के इथेनॉल थोपने के तरीके और निर्मला सीतारमण के बयानों से नाराज़ हैं। अब यह पीढ़ी सवाल पूछेगी'।
ठाकरे बंधुओं ने केंद्र पर साधा था निशाना
इससे कुछ दिन पहले एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ बेरहमी से पेश आ रही है, लेकिन अब छात्र किसी से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि छात्र अपने अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठा रहे हैं। वहीं, राज ठाकरे ने कहा कि छात्रों का आंदोलन अब बहुत बड़ा रूप ले चुका है, जिसके कारण सरकार बैकफुट पर आ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की मांगों को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
यह भी पढ़ें-
MEA: काला सागर में भारतीयों के लिए बढ़ा खतरा? विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी, जानें क्या दी गई चेतावनी
नीट पेपर लीक के बाद शुरू हुआ विवाद
बता दें कि, 3 मई 2026 में छात्रों ने नीट पेपर लीक होने के कारण रद्द हो गए। इसके बाद 20 जून से जंतर मंतर पर सीजेपी का आंदोलन शुरू हुआ। वहीं, 28 जून से सोनम वांगचुक भी जुड़ गए। सीजेपी ने बीते 20 जुलाई को संसद चलो मार्च की अगुवाई की। इस दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज की। वहीं, गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने, मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा।