शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने कहा कि आत्महत्या करने वाले किसानों के अंतिम संस्कार में किसी को शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी समस्याओं का समाधान तलाशें और अपने परिवारों को बेसहारा छोड़कर अपनी जान न दें।
बुलढाणा के विधायक गायकवाड़ ने कहा कि अगर किसी किसान की आत्महत्या के बाद उसके अंतिम संस्कार में कोई नहीं पहुंचे और उसके शव को जानवर खा जाएं, तो इससे आत्महत्या के बारे में सोच रहे दूसरे लोगों को इसके नतीजों का एहसास हो सकता है। उनके मुताबिक, इससे लोग ऐसा कदम उठाने से बच सकते हैं।
कैसे सामने आया विवादित बयान?
गायकवाड़ ने मंगलवार को बुलढाणा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह विवादित बयान दिया। उनसे एक नेता के हालिया बयान के बारे में सवाल पूछा गया था। उस नेता ने किसानों की आत्महत्या पर बात करते समय कथित तौर पर अनजाने में अपशब्द का इस्तेमाल किया था।
गायकवाड़ ने कहा, "अगर आपको (किसानों को) कोई परेशानी है, तो सरकार, अपने विधायक या सांसद को लिखकर बताइए। अगर ऐसा नहीं कर सकते, तो मुझे अपनी मुश्किलों के बारे में बताइए। हर कोई आपकी मदद करेगा। लेकिन अपनी जान देकर और अपने बच्चों को बेसहारा छोड़कर आप एक तरह से उन्हें सजा दे रहे हैं।"
संजय गायकवाड़ ने क्या कहा था?
उन्होंने आगे कहा, "आप अपनी पत्नी के साथ सात फेरे लेते हैं, सात जन्मों तक उसका साथ निभाने की कसम खाते हैं और अपने बच्चों की देखभाल करने का वादा करते हैं। लेकिन अगर आप बीच में ही अपनी जिंदगी खत्म कर लेते हैं, तो उन वादों का क्या होता है?"
शिवसेना विधायक ने कहा कि वह अपने भाषणों में हमेशा यह बात कहते रहे हैं कि अगर कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, तो उसके अंतिम संस्कार में किसी को शामिल नहीं होना चाहिए। गायकवाड़ ने कहा, "जब लोगों को यह एहसास होगा कि उनके शव को जानवर खा सकते हैं और उनके अवशेषों के साथ क्या हो सकता है, तभी वे आत्महत्या करना बंद करेंगे।"
बाघ का दांत पहन कर किया था शिकार का दावा
गायकवाड़ पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं। 2024 में उन्होंने अपने गले में बाघ का दांत पहनकर दिखाया था और दावा किया था कि उन्होंने 1987 में बाघ का शिकार किया था। पिछले साल मुंबई में विधायक हॉस्टल की कैंटीन में बासी खाना परोसने के आरोप में उन्होंने एक कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया था।