शिवसेना ने बुधवार को कहा कि पांच अगस्त को राममंदिर भूमि पूजन से पहले विवादित ढांचा का केस खत्म हो। विवादित ढांचा मामला खारिज होना रामजन्म भूमि आंदोलन के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मुखपत्र ‘सामना’ में ‘रामायण’ शीर्षक के तहत संपादकीय में कहा गया है कि रामायण हिंदुस्तान की जीवन पद्धति का अविभाज्य अंग है। जब तक सूर्य चंद्र है तब तक रामायण है। उसी सूर्य चंद्र की साक्षी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राममंदिर का भूमि पूजन करेंगे। इसी क्षण के लिए 28 साल पहले रामभक्त अयोध्या पहुंचे थे। उस समय राम भक्तों के खून, पसीने और आंसुओं से अयोध्या की भूमि भीग गई।
सरयू नदी कार सेवकों के रक्त से लाल हो गई। ऐसे कई भक्तों के त्याग के कारण राम मंदिर का भूमि पूजन का दिन देखने को मिल रहा है। लेकिन विरोधाभास देखिए। जहां विवादित ढांचा को तोड़कर राम मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है उस विवादित ढांचे को गिराने का मुकदमा आज भी लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे कई लोगों पर चल रहा है।
राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बावजूद सीबीआई ने अदालत में विवादित विध्वंस मामले को जारी रखा है। इसलिए विवादित ढांचे का मुकदमा राम मंदिर भूमिपूजन से पहले बर्खास्त कर दिया जाए।