सत्ताधारी शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के माध्यम से चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। शिवसेना का कहना है कि चुनाव आयोग बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ पक्षपात कर रहा है। चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक निकाय का कद राजनीतिक लाभ के लिए नहीं गिराया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता कम होती है। शिवसेना ने चुनाव आयोग के हाल के निर्देशों का जिक्र किया, जिनमें आयोग ने बंगाल की मुख्यमंत्री के प्रचार पर 24 घंटे की रोक लगा दी थी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख बनर्जी को अपना समर्थन दिया है।
सामना ने लिखा है कि पश्चिम बंगाल क्रांतिकारियों और विद्रोहियों की भूमि है। ममता बनर्जी की अकेली लड़ाई को इतिहास में याद रखा जाएगा, भले ही इस चुनाव के नतीजे कुछ भी हों। शिवसेना ने कूचबिहार फायरिंग पर कहा कि हिंसा को नियंत्रित करने के बजाय वोटरों पर गोली चलाई गई। केंद्र को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह का रास्ता लोकतंत्र विरोधी
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की प्रतिष्ठा दांव पर है, लेकिन चुनाव जीतने का उनका रास्ता लोकतंत्र और लोगों की स्वतंत्रता के खिलाफ है।