महाराष्ट्र में कभी एक साथ कदम से कदम चलने वाले दल भाजपा और शिवसेना आज एक दूसरे के चिर प्रतिद्वंदी हैं। दोनों पार्टियों के नेता गाहे-बगाहे एक-दूसरे पर तंज कसते रहते हैं। शिवसेना के सांसद संजय राउत ने मंगलवार को पुणे में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना अहंकार छोड़ दें तो कई समस्याएं हल हो सकती हैं। ये बातें उन्होंने पुणे में बाबा साहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन के उद्घाटन के दौरान कहीं।
संजय राउत ने कसा तंज
पुणे में डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर सांस्कृतिक भवन के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए राउत ने कहा कि गौतम बुद्ध का केवल एक ही संदेश ध्यान में रखना चाहिए और वह है अहंकार को छोड़ना। जिन लोगों ने अपना अहंकार छोड़ दिया है वे जीवन में विजयी हो गए हैं, लेकिन कुछ लोग अहंकार को छोड़ नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे अहंकार को छोड़ दें तो समाज, राज्य और देश के कई मुद्दों का समाधान हो जाएगा। उन्होंने पीएम पर तंज कसते हुए कहा कि किसी को यह नरेंद्र मोदी को बताना चाहिए।
हनुमान चालीसा का भी किया जिक्र
इस दौरान महाराष्ट्र के विभिन्न नगर निगमों के आगामी चुनावों के बारे में बोलते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने हनुमान चालीसा का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए लेकिन लोगों की समस्याएं भी महत्वपूर्ण हैं। शिवसेना के पार्षद लोगों से संबंधित कई बुनियादी मुद्दों को हल करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन हमने लाउडस्पीकर के बारे में कोई बयान नहीं दिया, लेकिन इस बार हम लोगों को शिव के बारे में बताने के लिए लाउडस्पीकर भी लगाएंगे।
लगातार करते रहते हैं कटाक्ष
गौरतलब है कि शिवसेना के सांसद संजय राउत हमेशा भाजपा और पीएम पर निशाना साधते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने भाजपा को आडे हाथों लेते हुए कहा था कि भाजपा महाराष्ट्र की सत्ता में कभी नहीं लौट सकती। उन्होंने कहा था कि शिवसेना ने कभी किसी के साथ धोखा नहीं किया। चूंकि भाजपा ने शिवसेना से किए अपने वादे का सम्मान नहीं किया, इसलिए महाराष्ट्र को महा विकास अघाडी (एमवीए) के रूप में एक अच्छी सरकार मिली।
2019 में किया था गठबंधन
2014-19 के दौरान राज्य में सत्ता साझा करने वाली शिवसेना और भाजपा ने मुख्यमंत्री पद साझा करने को लेकर मतभेदों के बाद 2019 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद नाता तोड़ लिया था। इसके बाद शिवसेना ने एमवीए सरकार बनाने के लिए एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया, जो अलग-अलग विचारों वाले दलों का एक असंभावित गठबंधन था।