आईएएस पूजा खेडकर का नाम आजकल काफी सुर्खियों में हैं। उनकी नियुक्ति को लेकर देशभर में घमासान मचा हुआ है। इस बीच, शिवसेना के राज्यसभा सदस्य मिलिंद देवड़ा ने भारतीय प्रशासनिक सेवा सहित देश की नौकरशाही की प्रणाली में जवाबदेही की मांग की है।
यह है मामला
2023 बैच की आईएएस अधिकारी खेडकर इस सप्ताह तब विवादों में फंस गईं, जब उनपर झूठ बोलने का आरोप लगा। दरअसल, सिविल सेवा परीक्षा के दौरान पूजा ने दावा किया था कि वह मानसिक रूप से दिव्यांग हैं और उन्हें देखने में भी समस्या है, लेकिन हैरानी है कि बिना जांच के ही उनका प्रशासनिक सेवा में चयन हो गया। इतना ही नहीं प्रोबेशन के समय अपने लिए घर, कार और कार्यालय जैसी मांगें भी की। इस पर अब विवाद हो रहा है।
हमारे लिए एक प्रणाली
देवड़ा ने कहा कि सार्वजनिक सेवा में लगे लोगों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनेताओं के पास ऐसी ही एक प्रणाली है, वो है चुनाव।
नौकरशाहों के लिए भी बनें नियम
उन्होंने आगे कहा, 'कई बार हम राजनेताओं की आलोचना की जाती है, चाहे हम किसी भी पार्टी के हों और ठीक ही तो है, मैं इसका स्वागत करता हूं। लेकिन कृपया ध्यान रखें कि राजनेताओं के पास अभी भी जवाबदेही की एक प्रणाली है। हमें वोट देकर सत्ता में लाया जाता है और वोट नहीं देकर बाहर भी निकाल दिया जाता है। साफ है कि जनता के पास हमें कार्यालय से बाहर फेंकने की शक्ति है।'
देवड़ा ने कहा, 'मगर भारत में नौकरशाही की बात करें तो यह काफी हद तक गैर-जवाबदेह बनी हुई है। प्रणाली के अंदर से जवाबदेही तय करना बहुत जरूरी है। इसलिए मैं फिर से कहता हूं कि अधिकारियों को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।'
क्या न्यायपालिका की कोई जवाबदेही नहीं?
शिवसेना के राज्यसभा सदस्य ने न्यायपालिका से जवाबदेही की भी मांग की। उन्होंने कहा, 'जब हम सुधार और शासन में बदलाव की बात करते हैं तो मेरा मानना है कि राजनेताओं की यह जवाबदेही है। मगर हमें न्यायिक और प्रशासनिक या नौकरशाही सुधारों के बारे में भी बात करनी होगी। वास्तव में, हम अपने लोकतंत्र के इन स्तंभों को और अधिक जवाबदेह कैसे बना रहे हैं? आप सिर्फ यह नहीं कह सकते कि हम राजनेताओं को जवाबदेह बना रहे हैं। क्या न्यायपालिका और नौकरशाही की कोई जवाबदेही नहीं है।'
परेशान करने वाली रिपोर्ट
देवड़ा ने एक मीडिया चैनल से कहा, 'मैंने जो रिपोर्ट पढ़ी है, उसके आधार पर यह परेशान करने वाला है। मेरा मानना है कि जो लोग सार्वजनिक सेवा में प्रवेश करते हैं, नौकरशाह या राजनेता या यहां तक कि मीडिया में भी, हमें खुद को एक मानक पर रखना होगा। हमें खुद से पूछना होगा कि हम अपने चुने हुए पेशे में क्यों हैं।'
उन्होंने महाराष्ट्र के उत्कृष्ट नौकरशाहों के लंबे इतिहास का हवाला दिया। साथ ही कहा कि इसलिए वह खेडकर के बारे में सुनकर बहुत परेशान थे। शिवसेना सांसद ने कहा, 'अगर यह मौजूदा संस्कृति है तो हमें इसे तुरंत खत्म करना चाहिए। वहीं, इस मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।'
ऐसे अधिकारियों को नहीं करना चाहिए बर्दाश्त
उन्होंने आगे कहा, 'अगर ये आरोप सही पाए जाते हैं तो ऐसे अधिकारियों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए कि ऐसे लोग सार्वजनिक सेवा में मौजूद न रहें।' उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग फिट नहीं हैं, उन्हें सिविल सेवा में प्रवेश नहीं करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
इससे पहले देवड़ा ने इस मामले पर एक्स पर भी पोस्ट किया। उन्होंने कहा, 'आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के खिलाफ आरोप सेवा की प्रतिष्ठा के लिए गंभीर खतरा हैं। क्या आप सरकार में सेवा करने के लिए हैं या हक की भावना के कारण? मैं महाराष्ट्र के मुख्य सचिव से बिना किसी देरी के इन आरोपों की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह करता हूं।'