दहशत फैलाने की साजिश और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के आरोप में महाराष्ट्र एंटी टेररिस्ट स्कॉट (एटीएस) ने जालना के शिवसेना पूर्व पार्षद श्रीकांत पारंगकर को गिरफ्तार किया है।
सोमवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया जहां उसे 28 अगस्त तक एटीएस की हिरासत में भेज दिया गया है। एटीएस के अधिकारी के मुताबिक दहशतवादी गतिविधि में पारंगकर के खिलाफ सबूत मिलने के बाद उसे रविवार की रात गिरफ्तार किया गया।
पारंगकर पर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम व गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने की धाराएं लगाई गई हैं। इससे पहले कथित गोरक्षक वैभव राउत, शरद कालस्कर और सुधन्वा गोंधलेकर को पकड़ा गया था। इसके बाद सचिन आंदुरे की गिर तारी हुई थी। इन आरोपियों से पूछताछ में एटीएस को नरेंद्र दाभोलकर हत्या के सुराग मिले हैं।
आरोप है कि शिवसेना का पूर्व पार्षद दाभोलकर की हत्या और राज्य में 9 से 11 अगस्त के बीच दहशत फैलाने की साजिश में शामिल था। औरंगाबाद निवासी आंदुरे को औरंगाबाद से गिर तार किया गया था उसे 26 अगस्त तक सीबीआई की हिरासत में भेजा गया है।
सीबीआई ने अदालत से कहा कि आंदुरे उन दो हमलावरों में शामिल था, जिन्होंने 20 2013 को अंधविश्वास के खिलाफ अलख जगाने वाले नरेन्द्र दाभोलकर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि उस वक्त सचिन के साथ श्रीकांत पांगरकर भी मोटरसाईकिल पर सवार था।
श्रीकांत पांगरकर साल 2001 और 2006 में दो बार शिवसेना का पार्षद चुना गया था। उसके बाद वह कट्टरवादी संगठन हिंदु जनजागृति समिति से जुड़ गया था।
शिवसेना के पूर्व पार्षद पांगरकर पर कथित रूप से धन मुहैया कराने का भी आरोप लगा है। एटीएस को शक है कि नालासोपारा में वैभव राऊत के घर से जब्त किए गए 20 देसी बम सहित बम बनाने की सामग्री का इस्तेमाल नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर आयोजित होने वाले मराठा आंदोलन की रैलियों में किया जाना था।
एटीएस के एक अधिकारी ने बताया कि बरामद किए गए विस्फोटक उत्तर प्रदेश से मंगाए गए थे। इससे आरोपियों के उत्तर प्रदेश लिंक को भी खंगाला जा रहा है। हालांकि अभी यह नहीं साफ हो पाया है कि पकड़े गए आरोपी मराठा आंदोलन के समर्थन में दहशत फैलाना चाहते थे या इसके विरोध में।